• होम
  • Blog
  • परशुराम जयंती: श्रद्धा, परंपरा और सामाजिक समरसता का पर्व

परशुराम जयंती: श्रद्धा, परंपरा और सामाजिक समरसता का पर्व

आज देशभर में भगवान परशुराम की जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। यह पावन अवसर परशुराम जयंती के रूप में विशेष महत्व रखता है, जिसे हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं, […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
inkhbar News
  • April 19, 2026 4:57 pm IST, Published 2 days ago

आज देशभर में भगवान परशुराम की जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। यह पावन अवसर परशुराम जयंती के रूप में विशेष महत्व रखता है, जिसे हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं, जिन्हें धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए पृथ्वी पर अवतरित होना पड़ा। वे अपने पराक्रम, तपस्या और न्यायप्रियता के लिए जाने जाते हैं। परशुराम जयंती के दिन भक्तजन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखकर भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
देश के विभिन्न हिस्सों में इस अवसर पर शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, भजन-कीर्तन का आयोजन होता है और धार्मिक कथाओं का वाचन किया जाता है। कई स्थानों पर समाजसेवी कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जिनमें गरीबों को भोजन और वस्त्र वितरित किए जाते हैं।
धार्मिक गुरुओं के अनुसार, परशुराम जयंती केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि यह हमें सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। आज के समय में भगवान परशुराम के आदर्शों को अपनाकर समाज में समरसता और नैतिकता को बढ़ावा दिया जा सकता है। परशुराम जयंती का पर्व श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का संदेश देते हुए पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

Tags

Advertisement