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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टकराव से अटकी शांति वार्ता, आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से की बात

मिडिल ईस्ट में शांति की कोशिशों पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। प्रस्तावित दूसरी मध्यस्थ वार्ता से पहले ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। जानकारी के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान अपने रुख पर अड़ा हुआ है। इस समुद्री मार्ग की दोबारा नाकेबंदी ने […]

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inkhbar News
  • April 20, 2026 4:34 pm IST, Published 3 hours ago

मिडिल ईस्ट में शांति की कोशिशों पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। प्रस्तावित दूसरी मध्यस्थ वार्ता से पहले ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। जानकारी के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान अपने रुख पर अड़ा हुआ है। इस समुद्री मार्ग की दोबारा नाकेबंदी ने शांति वार्ता की संभावनाओं को झटका दिया है। इस बीच, रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की। बातचीत में हॉर्मुज की स्थिति को वार्ता में बड़ी बाधा बताया गया। ट्रंप ने इस पर विचार करने की बात कही है।

सीजफायर की समय-सीमा समाप्ति के करीब
दोनों देशों के बीच घोषित अस्थायी युद्धविराम 21 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। ऐसे में एक बार फिर तनावपूर्ण बयानबाजी तेज हो गई है और हालात अनिश्चित बने हुए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर पाकिस्तान में प्रस्तावित वार्ता में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इस बार उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के दौरे की संभावना नहीं जताई जा रही है। हाल ही में इस्लामाबाद में उस समय हलचल तेज हो गई, जब नूर ख़ान एयरबेस पर अमेरिका के चार सैन्य विमान उतरने की खबर सामने आई। इसके साथ ही सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए गए और ट्रैफिक एडवाइजरी भी जारी की गई। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी भी पाकिस्तान पहुंचे हैं, जिससे यह संकेत मिलते हैं कि वार्ता की तैयारियां तेज हो रही थीं।

वहीं, ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका अत्यधिक शर्तें थोप रहा है। ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान  ने स्पष्ट कहा है कि उनका देश अपने परमाणु कार्यक्रम और तकनीकी अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगा। मौजूदा हालात में शांति वार्ता का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसका असर पड़ सकता है।

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