नज़रिया

सिनेमा के माध्यम से जीवन और मानव चेतना की यात्रा

02 May 2026 09:22 PM IST

भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो केवल फिल्मकार नहीं, बल्कि एक पूरी सांस्कृतिक चेतना के प्रतिनिधि बन जाते हैं। सत्यजीत रे उन्हीं में से एक हैं। उनकी जयंती केवल एक कलाकार को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उस दृष्टि, संवेदना और मानवीयता को पुनः समझने का दिन है, जिसने भारतीय […]

राजनीति का चक्र बड़ा निर्दयी होता है

26 Apr 2026 09:02 PM IST

नई दिल्ली : राजनीति का चक्र बड़ा निर्दयी होता है। जो कभी “आम आदमी” के नाम पर व्यवस्था बदलने निकला था, आज उसी की पार्टी सत्ता, स्वार्थ और अवसरवाद की आँधी में बिखरती दिख रही है। सात राज्यसभा सांसदों का भाजपा में जाना केवल दल-बदल नहीं, यह उस नैतिकता के गुब्बारे की हवा निकलना है […]

बहुध्रुवीय दुनिया में भारत: स्वायत्तता, साझेदारी और शक्ति संतुलन

25 Apr 2026 07:31 PM IST

मध्य-पूर्व का वर्तमान संकट आज किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे एक ऐसे वैश्विक मोड़ में बदल चुका है जहाँ ताकत, संसाधन, ऊर्जा, सुरक्षा और कूटनीति… सब एक साथ दांव पर लगे हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता तनाव, बातचीत का बार-बार विफल होना और क्षेत्रीय शक्तियों […]

पर उपदेश कुशल बहुतेरे” धर्म और समाज के क्षेत्र में तो यह परंपरा और भी समृद्ध है

23 Apr 2026 06:10 PM IST

हमारा समाज बड़ा उदार है। यहाँ लोग स्वयं चाहे जीवन की गाड़ी धक्के से चला रहे हों, पर दूसरों को जीवन-प्रबंधन पर ऐसा भाषण देंगे मानो ब्रह्मा जी ने सृष्टि-रचना से पहले इन्हीं से सलाह ली हो। सच ही कहा गया है “पर उपदेश कुशल बहुतेरे।” अर्थात् अपने जीवन का हिसाब भले ही अस्त-व्यस्त हो, […]

दूसरों की खुशी से उपजा अवसाद यह ईर्ष्या मात्र नहीं, बल्कि तुलना से जन्मा वह सूक्ष्म अवसाद है जो आत्मा को भीतर ही भीतर खोखला कर देता है।

20 Apr 2026 01:02 AM IST

आज का मनुष्य जितना अपने दुःखों से नहीं टूटता, उससे कहीं अधिक वह दूसरों की खुशियों को देखकर भीतर ही भीतर बिखरने लगता है। यह केवल ईर्ष्या नहीं है, यह एक ऐसा अवसाद है जो तुलना की आग में जन्म लेता है और धीरे-धीरे आत्मा को खोखला कर देता है। पहले मनुष्य अपने जीवन को […]

लव जिहाद: एक गहरी साजिश या हमारी सांस्कृतिक उपेक्षा?

18 Apr 2026 01:12 PM IST

आज के दौर में समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों पर ‘लव जिहाद’ एक निरंतर चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रश्न यह उठता है कि इस सोच की उत्पत्ति आखिर हुई कैसे? प्रेम के मार्ग से सब कुछ संभव है—यह धारणा रातों-रात पैदा नहीं हुई। सत्य तो यह है कि यह कोई तात्कालिक घटना नहीं, […]

बुलंदियों पर समाजवाद

16 Apr 2026 05:58 PM IST

समाजवाद के लिए आज बहुत बड़ा दिन है। हम पुरबिया भईया लोग समाजवाद को जीने वाले गिरमिटिया मजदूर लोग है। आज भाजपा ने समाजवाद को शिखर पर पहुँचा दिया।पूर्वांचल और बिहार समाजवाद की नर्सरी है और बनारस समाजवाद की राजधानी है।आचार्य नरेंद्र देव, राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण, राजनारायण जी, कर्पूरी ठाकुर से होते […]

नारी: संघर्ष, संभावनाएँ और समाज

15 Apr 2026 06:06 PM IST

भारतीय संस्कृति में नारी को सृष्टि की जननी, शक्ति और संवेदना का स्रोत माना गया है। हमारे शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है –   “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता” –  अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है। किंतु यह आदर्श वाक्य आज भी व्यवहारिक जीवन में पूर्णतः साकार नहीं हो पाया है। आधुनिकता […]

सतुआन की परंपरा: सत्तू, संघर्ष और ग्रामीण जीवन की सच्ची कहानी

14 Apr 2026 07:18 PM IST

भारत के ग्रामीण जीवन की असली तस्वीर समझनी हो तो हमें कुछ दशक पीछे झांकना होगा। आज भले ही खेती और उत्पादन के आधुनिक साधनों ने गांवों की तस्वीर बदल दी हो, लेकिन लगभग 40–50 साल पहले हालात बिल्कुल अलग थे। उस समय खेती पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर थी और उपज इतनी कम होती […]