तमिल सिनेमा के सुपरस्टार से नेता बने सी जोसेफ विजय ने आज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित भव्य समारोह में विजय ने तमिल भाषा में शपथ ली।शपथ के दौरान एक दिलचस्प पल भी देखने को मिला जब निर्धारित शपथ-पत्र से आगे बोलने पर राज्यपाल ने उन्हें टोकते हुए कहा कि वही पढ़ें जो आधिकारिक तौर पर लिखा गया है। कुछ क्षणों के लिए समारोह में हलचल जरूर हुई, लेकिन इसके बाद विजय ने औपचारिक प्रक्रिया पूरी की और मुख्यमंत्री पद संभाल लिया।
लेकिन इस शपथ ग्रहण की सबसे बड़ी कहानी राजनीति से ज्यादा “समय के बदले हुए दौर” की है। यही वह नेहरू स्टेडियम है, जहाँ साल 2013 में तमिल सिनेमा के 100 साल पूरे होने पर भव्य समारोह आयोजित हुआ था। उस कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता की मौजूदगी में विजय को चौथी पंक्ति में बैठाया गया था।
उस वक्त विजय की फिल्म थलाइवा को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। माना गया कि फिल्म में विजय की राजनीतिक महत्वाकांक्षा की झलक दिखाई देती है, जिससे सत्ता नाराज़ थी। नतीजा यह हुआ कि तमिल सिनेमा के बड़े स्टार होने के बावजूद विजय को पीछे की सीट दी गई। उस दिन कई लोगों ने इसे एक सामान्य प्रोटोकॉल समझकर नजरअंदाज कर दिया, लेकिन राजनीति की पटकथा कहीं और लिखी जा रही थी।
आज वही विजय उसी स्टेडियम के मंच पर सबसे आगे खड़े थे। जयललिता अब इस दुनिया में नहीं हैं और उनकी पार्टी AIADMK राज्य की राजनीति में कमजोर पड़ चुकी है। दूसरी ओर विजय की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam ने सत्ता तक का सफर तय कर लिया।
मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय ने अपने पहले संबोधन में राज्य की आर्थिक स्थिति और कानून-व्यवस्था को सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु पर लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है और प्रशासन में आने के बाद ही असली चुनौतियों का अंदाजा होता है।
विजय ने कहा,“मैं ईमानदारी और मजबूत इरादों के साथ तमिलनाडु को आगे ले जाना चाहता हूं। राज्य की हर महिला की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता होगी। महिलाओं के खिलाफ अपराध पर तुरंत कार्रवाई होगी। ड्रग्स के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाएगा और युवाओं के पुनर्वास पर भी काम होगा।”
इस शपथ ग्रहण समारोह की एक और बड़ी चर्चा रही 29 वर्षीय एस कीर्तना, जिन्होंने मंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया। शिवकाशी सीट से जीत दर्ज करने वाली कीर्तना विजय सरकार की सबसे कम उम्र की मंत्री बनी हैं। युवा चेहरे को मंत्रिमंडल में जगह देकर विजय ने साफ संकेत दिया है कि उनकी राजनीति में नई पीढ़ी को बड़ी भूमिका मिलने वाली है।
विजय की यह कहानी सिर्फ एक अभिनेता के मुख्यमंत्री बनने की नहीं है, बल्कि यह उस सफर की कहानी है जिसमें अपमान, संघर्ष, धैर्य और समय की सबने मिलकर इतिहास लिखा। जो कभी चौथी पंक्ति में बैठाया गया था, आज वही तमिलनाडु की सत्ता की पहली कुर्सी पर बैठा है। राजनीति में समय कब करवट बदल ले, कोई नहीं जानता। यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत भी है और सबसे बड़ा संदेश भी।