नई दिल्ली: नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई (CBI) ने सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में एक बड़ा सनसनीखेज खुलासा किया। जांच एजेंसी के मुताबिक, पुणे की एक नामी मेडिकल एकेडमी में फिजिक्स फैकल्टी (शिक्षक) रहे आरोपी हर्षदकुमार शाह ने प्रश्नपत्र की व्यवस्था (अरेंज) कराने में मुख्य भूमिका निभाई थी।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि हर्षदकुमार शाह ने ही फिजिक्स का लीक हुआ प्रश्नपत्र मनीषा हवालदार नाम की महिला तक पहुंचाया था। तकनीकी जांच और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी ने पुष्टि की है कि मनीषा के मोबाइल से जो प्रश्नपत्र बरामद हुआ, वह हुबहू वही लीक पेपर था।
सोमवार को सीबीआई ने इस मामले में गिरफ्तार तीन प्रमुख आरोपियों— डॉ. मनोज शिरुरे, हर्षदकुमार शाह और मनीषा हवालदार को राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज के सामने पेश किया। सीबीआई ने दलील दी कि आरोपियों से शुरुआती पूछताछ पूरी हो चुकी है और जांच को प्रभावित होने से रोकने के लिए इन्हें जेल भेजा जाना जरूरी है। कोर्ट ने केंद्रीय एजेंसी की दलील को स्वीकार करते हुए तीनों आरोपियों को 15 जून 2026 तक न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया है।
सीबीआई ने कोर्ट के सामने इस गिरोह के वित्तीय लेन-देन का भी ब्योरा रखा।
डॉ. मनोज शिरुरे की भूमिका: सीबीआई का दावा है कि डॉ. मनोज शिरुरे इस पेपर लीक नेटवर्क के सबसे सक्रिय सदस्यों में से एक थे।
डील और बरामदगी: उन्होंने इस पूरे खेल के मुख्य मास्टरमाइंड ‘शिवराज मोटेगांवकर’ से पेपर आगे बढ़ाने के बदले 5 लाख रुपए की एडवांस रकम ली थी।
सीबीआई की छापेमारी: जांच एजेंसी ने एक गुप्त सूचना के आधार पर डॉ. मनोज की बहन के घर पर छापेमारी की, जहां से यह पूरी 5 लाख रुपए की नकदी (कैश) बरामद कर ली गई है।
एक तरफ जहां सीबीआई आरोपियों पर शिकंजा कस रही है, वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने भी परीक्षा के आयोजन को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी 21 जून को होने वाली नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा (Re-Exam) अपने पुराने तय शेड्यूल के अनुसार पेन-पेपर मोड (ओएमआर शीट) में ही आयोजित की जाएगी।
अदालत ने इसे ऑनलाइन या कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) में बदलने की मांग वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि परीक्षा एजेंसियां पहले से ही भारी दबाव में हैं और इतने कम समय में इंफ्रास्ट्रक्चर बदलना छात्रों के हित में नहीं होगा।