स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सोशल मीडिया पर एक पुराने वीडियो को साझा करना कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और लोक गायिका नेहा सिंह राठौर के लिए विवाद का कारण बन गया है। आरोप है कि दोनों ने पूर्व मंत्री से जुड़ा एक पुराना वीडियो स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया पर साझा किया। इस मामले में पुलिस ने सुप्रिया श्रीनेत, नेहा सिंह राठौर और कुछ अन्य सोशल मीडिया पेजों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, विवाद उस वीडियो को लेकर है जिसे स्वतंत्रता दिवस के दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट या शेयर किया गया। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि वीडियो पुराना था, लेकिन उसे मौजूदा अवसर से जोड़कर प्रसारित किया गया। इसके कारण लोगों के बीच गलत धारणा बनने और भ्रामक तरीके से सामग्री फैलने की आशंका जताई गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित लोगों और सोशल मीडिया पेजों को मामले में आरोपी बनाया है।
इस मामले में कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है। श्रीनेत सोशल मीडिया पर सरकार और विपक्ष से जुड़े मुद्दों पर लगातार मुखर रहती हैं। वहीं, नेहा सिंह राठौर भी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी टिप्पणियों और लोकगीतों के लिए जानी जाती हैं। दोनों की सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं, इसलिए उनके द्वारा साझा की गई किसी भी सामग्री का तेजी से प्रसार होना स्वाभाविक है।
पुलिस की ओर से दर्ज FIR के बाद अब जांच का दायरा इस बात पर केंद्रित रहेगा कि वीडियो वास्तव में कब का है, उसे किस संदर्भ में साझा किया गया और पोस्ट करने वाले लोगों की मंशा क्या थी। जांच में यह भी देखा जा सकता है कि वीडियो को किसी पुराने प्रसंग से अलग करके नए संदर्भ में तो पेश नहीं किया गया। सोशल मीडिया पर सामग्री साझा करने से जुड़े मामलों में पोस्ट के मूल स्रोत, शेयर करने का समय और उसके साथ लिखे गए संदेश को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय महत्व के अवसर पर सोशल मीडिया पर पुरानी सामग्री के दोबारा प्रसारित होने के मामले पहले भी विवाद पैदा करते रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी पुराने वीडियो या तस्वीर को नए घटनाक्रम से जोड़कर पेश करने से लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी वजह से किसी भी संवेदनशील सामग्री को साझा करने से पहले उसके स्रोत और तारीख की पुष्टि करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस मामले में FIR दर्ज होना अभी आरोपों की पुष्टि नहीं है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित लोगों की भूमिका क्या थी और साझा किए गए वीडियो के पीछे वास्तविक संदर्भ क्या था। आरोपों को लेकर संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और साफ हो सकती है।
फिलहाल FIR दर्ज होने के बाद यह मामला राजनीतिक बहस के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों के बयान से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पुराने वीडियो को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर साझा करने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।