लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में वह युवाओं को नौकरी के पीछे भागने के बजाय स्वरोजगार के माध्यम से आगे बढ़ने की सलाह देते दिखाई दे रहे हैं। चार घंटे ई-रिक्शा चलाने और दोपहर में दोस्तों के साथ समय बिताने संबंधी उनका बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
आजतक के इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किए गए इस वीडियो में उपमुख्यमंत्री युवाओं को नौकरी के बजाय अपना काम करने की सलाह देते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद रोजगार, स्वरोजगार और युवाओं के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
भारत टैक्सी के शुभारंभ कार्यक्रम में दिया बयान
दरअसल, यह मामला 23 सितंबर 2026 का है। राजधानी लखनऊ में भारत टैक्सी सेवा के उत्तर प्रदेश में शुभारंभ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित कई मंत्री उपस्थित थे।
इसी कार्यक्रम में ब्रजेश पाठक ने लोगों को अपनी गाड़ी चलाकर आय अर्जित करने और परिवार के लिए समय निकालने का सुझाव दिया था। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि व्यक्ति कुछ घंटे गाड़ी चलाकर कमाई कर सकता है और बाकी समय परिवार के साथ बिता सकता है।
उन्होंने नौकरी करने वालों की समय संबंधी सीमाओं का उल्लेख करते हुए स्वरोजगार के फायदे बताए। साथ ही सुझाव दिया कि चालक दिन की आखिरी सवारी अपने घर के आसपास की लें, ताकि काम समाप्त करने के बाद उन्हें घर लौटने में आसानी हो।
वायरल वीडियो पर विपक्ष ने उठाए सवाल
उपमुख्यमंत्री के बयान का वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया दी। समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिप्पणी करते हुए युवाओं की भूमिका और उनके भविष्य का मुद्दा उठाया।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी इस बयान की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सत्ता में बैठे नेता अपने परिवार के युवाओं को भी इसी तरह की सलाह देंगे।
विपक्षी नेताओं की इन प्रतिक्रियाओं के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर भी रोजगार और स्वरोजगार के मुद्दे को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं।
क्या है भारत टैक्सी का सहकारी मॉडल?
ब्रजेश पाठक का बयान जिस कार्यक्रम में दिया गया, उसका मुख्य उद्देश्य भारत टैक्सी सेवा को बढ़ावा देना था। यह सेवा सहकारी व्यवस्था पर आधारित है, जिसमें चालकों को केवल वाहन चलाने वाले कर्मचारी के बजाय व्यवसाय में हिस्सेदार बनाने की परिकल्पना की गई है।
इस मॉडल में चालकों की कमाई बढ़ाने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। कार्यक्रम में शून्य कमीशन व्यवस्था तथा चालकों के लिए पांच लाख रुपये तक की सामाजिक सुरक्षा का भी उल्लेख किया गया।
इसका उद्देश्य निजी ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के साथ एक वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। सहकारी मॉडल के माध्यम से चालकों को अपनी कमाई और कामकाज में अधिक भागीदारी देने की योजना है।
रोजगार और स्वरोजगार को लेकर छिड़ी नई बहस
उपमुख्यमंत्री के बयान ने नियमित नौकरी और स्वरोजगार के बीच अंतर को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। नियमित नौकरी में कर्मचारियों को निर्धारित वेतन और काम के घंटे मिल सकते हैं। वहीं स्वरोजगार में व्यक्ति को अपने काम का समय तय करने की अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता मिलती है।
हालांकि, स्वरोजगार के साथ आर्थिक जोखिम भी जुड़े होते हैं। वाहन खरीदने की लागत, ऋण की किस्त, बीमा, रखरखाव, ईंधन अथवा चार्जिंग और यात्रियों की उपलब्धता जैसे कारक चालक की वास्तविक कमाई निर्धारित करते हैं।
किसी भी स्वरोजगार की आर्थिक उपयोगिता का आकलन केवल दैनिक आमदनी के आधार पर नहीं किया जा सकता। वास्तविक लाभ जानने के लिए कुल आय में से परिचालन खर्च घटाना भी जरूरी होता है।
युवाओं के सामने रोजगार के विभिन्न विकल्प
उत्तर प्रदेश सहित देशभर में युवा सरकारी नौकरी, निजी क्षेत्र, उद्यमिता और स्वरोजगार के माध्यम से अपने करियर का निर्माण करते हैं। इनमें से प्रत्येक विकल्प के लिए अलग-अलग कौशल, संसाधन और परिस्थितियों की आवश्यकता होती है।
टैक्सी और ई-रिक्शा संचालन भी परिवहन क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराते हैं। विशेष रूप से शहरी और अर्धशहरी इलाकों में ये सेवाएं यात्रियों के दैनिक आवागमन का महत्वपूर्ण साधन हैं।
दूसरी ओर, तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं की आकांक्षाएं अलग हो सकती हैं। ऐसे में रोजगार संबंधी योजनाओं और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली नीतियों का महत्व बना रहता है।
पूरे संदर्भ में बयान को समझना जरूरी
वायरल वीडियो को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ब्रजेश पाठक भारत टैक्सी के शुभारंभ कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। उनका भाषण टैक्सी संचालन और उससे जुड़े स्वरोजगार के अवसरों के संदर्भ में दिया गया था।
वायरल क्लिप के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि उन्होंने प्रदेश में सभी प्रकार की नौकरियां छोड़ने के लिए कोई औपचारिक सरकारी निर्देश दिया है।
फिलहाल, उनके बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इस घटनाक्रम ने रोजगार के अवसरों, स्वरोजगार की आर्थिक व्यवहार्यता और युवाओं की भविष्य संबंधी अपेक्षाओं को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।