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इस्कॉन मंदिर स्वामित्व विवाद में समीक्षा याचिका पर नई पीठ संभव

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु स्थित हरे कृष्ण मंदिर और उससे जुड़ी संपत्तियों के स्वामित्व विवाद में समीक्षा याचिका की सुनवाई के लिए नई पीठ गठित करने के अनुरोध पर विचार करने की बात कही है। यह मामला इस्कॉन की दो इकाइयों के बीच मंदिर और संबंधित संपत्ति के अधिकार को लेकर लंबे समय […]

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Supreme Court petition in ISKCON
Gauravshali Bharat News
  • August 18, 2026 1:10 pm IST, Published 16 minutes ago

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु स्थित हरे कृष्ण मंदिर और उससे जुड़ी संपत्तियों के स्वामित्व विवाद में समीक्षा याचिका की सुनवाई के लिए नई पीठ गठित करने के अनुरोध पर विचार करने की बात कही है। यह मामला इस्कॉन की दो इकाइयों के बीच मंदिर और संबंधित संपत्ति के अधिकार को लेकर लंबे समय से अदालत में चल रहा है। विवाद करीब डेढ़ दशक से न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है।

मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष हुई। इसमें न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। सुनवाई के दौरान इस्कॉन मुंबई की ओर से पेश वकील ने समीक्षा याचिका पर सुनवाई के लिए नई पीठ के गठन का अनुरोध रखा। वकील ने अदालत को बताया कि इससे पहले समीक्षा याचिका अलग-अलग पीठों के सामने सूचीबद्ध हुई थी, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो सकी।

वकील के अनुसार, समीक्षा याचिका पहले न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और बाद में न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठों के समक्ष सूचीबद्ध की गई थी। हालांकि, किसी कारणवश मामले पर सुनवाई आगे नहीं बढ़ पाई। इसके बाद अब प्रधान न्यायाधीश के समक्ष नई पीठ गठित करने का अनुरोध किया गया है।

इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने 16 मई 2025 को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए बेंगलुरु के मंदिर और उससे संबंधित संपत्ति पर इस्कॉन बेंगलुरु के अधिकार को स्वीकार किया था। इससे पहले निचली अदालतों में मामले को लेकर अलग-अलग स्तर पर कानूनी विवाद चलता रहा था।

इसके बाद फैसले की समीक्षा के लिए याचिका दायर की गई। नवंबर 2025 में इस समीक्षा याचिका पर न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की पीठ ने सुनवाई की। दोनों न्यायाधीशों की राय एक जैसी नहीं रही। न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने समीक्षा याचिका को खुली अदालत में सुनने की अनुमति देने का पक्ष लिया, जबकि न्यायमूर्ति मसीह को रिकॉर्ड में ऐसी स्पष्ट त्रुटि नहीं मिली जिसके आधार पर समीक्षा याचिका स्वीकार की जा सके। उन्होंने याचिका खारिज करने की राय दी।

दोनों न्यायाधीशों की अलग-अलग राय सामने आने के बाद मामला आगे की कार्रवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया गया। अब नई पीठ के गठन के अनुरोध पर विचार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका की प्रक्रिया आम तौर पर सीमित दायरे में होती है और इसमें यह देखा जाता है कि पहले के फैसले में कोई स्पष्ट कानूनी या रिकॉर्ड संबंधी त्रुटि तो नहीं है।

हरे कृष्ण मंदिर और संपत्ति का यह विवाद वर्ष 2011 से अदालत में लंबित बताया गया है। इतने लंबे समय से चल रहे इस मामले में मंदिर के प्रबंधन, स्वामित्व और संबंधित संपत्तियों के अधिकार को लेकर कानूनी सवाल उठते रहे हैं। दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावों के समर्थन में अदालत के समक्ष तर्क रखे हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर है। यदि नई पीठ के गठन का फैसला होता है तो समीक्षा याचिका पर आगे सुनवाई का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि, नई पीठ बनने या समीक्षा याचिका पर अंतिम निर्णय होने तक मंदिर और संपत्ति से जुड़े विवाद का कानूनी समाधान पूरी तरह स्पष्ट नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख से यह संकेत मिलता है कि अदालत समीक्षा याचिका से जुड़े प्रक्रियात्मक पहलुओं पर विचार करने के लिए तैयार है। आने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि मामले की सुनवाई किस पीठ के समक्ष होगी और समीक्षा याचिका पर आगे किस तरह की न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

 

 

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