सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे के मुताबिक देश की राजनीति में आपराधिक मामलों से जुड़े जनप्रतिनिधियों की संख्या को लेकर गंभीर तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा और राज्यसभा के कुल 326 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी चुनावी हलफनामों में घोषित की है। यह जानकारी राजनीति के अपराधीकरण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष रखी गई।
वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमित्र नियुक्त किया है। उनके द्वारा दाखिल रिपोर्ट में विभिन्न उच्च न्यायालयों से मिले आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा के 543 मौजूदा सदस्यों में से 251 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 170 मामले गंभीर श्रेणी के बताए गए हैं, जिनमें दोष सिद्ध होने पर पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो सकता है।
राज्यसभा की स्थिति भी इसी तरह चिंता का विषय बताई गई है। 233 सदस्यों में से 75 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 40 मामलों को गंभीर श्रेणी में रखा गया है। आंकड़ों के अनुसार राज्यसभा के लगभग एक तिहाई सदस्य आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं।
रिपोर्ट में मुख्यमंत्रियों से जुड़े आंकड़े भी सामने रखे गए हैं। 28 राज्यों में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की है। इनमें कुछ मामले गंभीर प्रकृति के भी हैं। रिपोर्ट में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ सबसे अधिक 89 मामलों का उल्लेख किया गया है। इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ 29 और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के खिलाफ 19 मामले बताए गए हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ भी 19 मामलों का उल्लेख है, जबकि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ पांच मामले बताए गए हैं।
न्यायमित्र की रिपोर्ट के अनुसार पूर्व और वर्तमान सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ देशभर में 4,192 आपराधिक मामले अभी लंबित हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2025 के दौरान 1,243 मामलों का निपटारा हुआ, जबकि इसी अवधि में 1,050 नए मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वर्ष 2018 से मामलों की निगरानी और तेजी से सुनवाई के प्रयासों के बावजूद लंबित मामलों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं आई है।
राज्यवार आंकड़ों में भी कई जगह आपराधिक मामलों का अनुपात काफी अधिक दिखाई देता है। रिपोर्ट के मुताबिक केरल में 20 में से 19 सांसद आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं। इनमें 11 के खिलाफ गंभीर मामले बताए गए हैं। तेलंगाना में 17 में से 14 सांसदों के खिलाफ मामले हैं। ओडिशा में 21 में से 16, झारखंड में 14 में से 10 और तमिलनाडु में 39 में से 26 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी लगभग आधे सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले होने की बात रिपोर्ट में सामने आई है। अन्य राज्यों में भी अलग-अलग अनुपात में सांसद ऐसे मामलों का सामना कर रहे हैं।
रिपोर्ट में सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाने की जरूरत पर जोर दिया गया है। न्यायमित्र ने सुझाव दिया है कि ऐसे मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था और प्रभावी निगरानी को मजबूत किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि लंबे समय तक मुकदमे लंबित रहने से न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दाखिल यह रिपोर्ट राजनीति में आपराधिक मामलों से जुड़े जनप्रतिनिधियों की स्थिति और लंबित मुकदमों की गंभीरता को रेखांकित करती है। अब अदालत के निर्देश और आगे की सुनवाई से यह तय होगा कि इन मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।