• होम
  • दिल्ली
  • अमेरिका-ईरान समझौते से तेल बाजार में बड़ी गिरावट, कच्चा तेल 4% से अधिक टूटा; भारत को मिल सकती है राहत

अमेरिका-ईरान समझौते से तेल बाजार में बड़ी गिरावट, कच्चा तेल 4% से अधिक टूटा; भारत को मिल सकती है राहत

नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार में सोमवार को बड़ी हलचल देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा संभावित समझौते की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस घटनाक्रम ने निवेशकों को राहत दी है और […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • June 15, 2026 6:00 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार में सोमवार को बड़ी हलचल देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा संभावित समझौते की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस घटनाक्रम ने निवेशकों को राहत दी है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहे ऊर्जा संकट के खतरे को कुछ हद तक कम कर दिया है।

बाजार के आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4 प्रतिशत से अधिक लुढ़ककर 83.96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी गिरकर 80.25 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। तेल की कीमतों में यह गिरावट हाल के दिनों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में सुधार की संभावना ने बाजार की धारणा को बदल दिया है। पिछले कुछ सप्ताहों से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों को आशंका थी कि तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। लेकिन समझौते की खबर सामने आने के बाद आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं कमजोर पड़ गई हैं।

इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़ा है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहती है, तो तेल आपूर्ति सामान्य रहने की उम्मीद है, जिससे कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

तेल कीमतों में आई इस गिरावट का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में निवेशकों का भरोसा बढ़ा और कई प्रमुख सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई। ऊर्जा लागत घटने की उम्मीद से उद्योग जगत में भी सकारात्मक माहौल बना है।

भारत के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक नीचे रहती हैं, तो इससे भारत का आयात बिल कम हो सकता है और महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की घरेलू कीमतों पर इसका असर तत्काल देखने को मिलने की संभावना कम है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता की दिशा और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि समझौता मजबूत रूप लेता है, तो तेल की कीमतों में और नरमी आ सकती है। वहीं किसी नए तनाव की स्थिति में बाजार फिर से अस्थिर हो सकता है।

Advertisement