नई दिल्ली: देश के डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक सेक्टर के लिए एक बड़े घटनाक्रम में दिल्ली हाईकोर्ट ने Paytm Payments Bank Limited (PPBL) को बंद (वाइंड-अप) करने का आदेश दिया है। यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अप्रैल 2026 में बैंक का लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद आया है। अदालत ने बैंक के परिसमापन (Liquidation) की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक गिरिकुमार एम. नायर को आधिकारिक परिसमापक (Official Liquidator) नियुक्त किया है।
यह फैसला Paytm Payments Bank के संचालन का अंतिम कानूनी चरण माना जा रहा है। पिछले कई वर्षों से बैंक पर नियामकीय मानकों का पालन न करने और संचालन संबंधी गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगते रहे थे। RBI ने समय-समय पर बैंक पर विभिन्न प्रतिबंध लगाए थे और अंततः बैंकिंग लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया था।
RBI के अनुसार बैंक का संचालन इस प्रकार किया जा रहा था जिससे जमाकर्ताओं और बैंक के हित प्रभावित हो सकते थे। इसी आधार पर केंद्रीय बैंक ने दिल्ली हाईकोर्ट में बैंक को बंद करने की याचिका दायर की थी। अदालत ने Banking Regulation Act, 1949 तथा Companies Act, 2013 के प्रावधानों के तहत बैंक के परिसमापन का आदेश जारी किया।
क्या होगा परिसमापक की भूमिका?
दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त आधिकारिक परिसमापक अब बैंक के बोर्ड की सभी शक्तियों का उपयोग करेंगे। वे बैंक की संपत्तियों, देनदारियों, खातों तथा अन्य कानूनी प्रक्रियाओं की निगरानी करेंगे और कानून के अनुसार परिसमापन की पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। इस दौरान बैंक के शेष प्रशासनिक और कानूनी मामलों का निपटारा भी उनके निर्देशन में किया जाएगा।
RBI ने पहले क्या कार्रवाई की थी?
Paytm Payments Bank पर RBI की सख्ती कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं था। वर्ष 2022 में बैंक को नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया गया था। इसके बाद लगातार निरीक्षण और ऑडिट के दौरान कई नियामकीय कमियां सामने आईं। जनवरी 2024 में बैंक पर नए डिपॉजिट, वॉलेट टॉप-अप और कुछ अन्य बैंकिंग सेवाओं पर रोक लगा दी गई थी। अंततः अप्रैल 2026 में RBI ने बैंक का लाइसेंस निरस्त कर दिया और बैंकिंग गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगा दी।
ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश मुख्य रूप से Paytm Payments Bank से संबंधित है, न कि पूरे Paytm प्लेटफॉर्म से। Paytm की अन्य सेवाएं, जो साझेदार बैंकों के माध्यम से संचालित होती हैं, अलग व्यवस्था के तहत काम करती हैं। हालांकि जिन ग्राहकों का सीधा संबंध Paytm Payments Bank से था, उनके मामलों का निपटारा अब परिसमापन प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
डिजिटल बैंकिंग सेक्टर के लिए बड़ा संदेश
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश के बैंकिंग और फिनटेक उद्योग के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि नियामकीय अनुपालन (Regulatory Compliance) में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ-साथ पारदर्शिता, कॉरपोरेट गवर्नेंस और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।
निवेशकों और उद्योग की नजर
Paytm Payments Bank कभी भारत के सबसे बड़े पेमेंट्स बैंकों में शामिल था और डिजिटल भुगतान व्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। लेकिन लगातार बढ़ती नियामकीय कार्रवाई के बाद बैंक की गतिविधियां सीमित होती गईं। अब अदालत के आदेश के बाद बैंक का संचालन औपचारिक रूप से समाप्ति की ओर बढ़ गया है।
अब आधिकारिक परिसमापक बैंक की परिसंपत्तियों और देनदारियों का आकलन करेंगे तथा कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे। संबंधित पक्षों और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम भी नियमानुसार उठाए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी न्यायालय और संबंधित नियामकीय संस्थाएं करेंगी।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का बैंकिंग नियामक ढांचा वित्तीय संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता, जवाबदेही और ग्राहक हितों की सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता करने के पक्ष में नहीं है। Paytm Payments Bank का यह मामला आने वाले समय में फिनटेक और डिजिटल बैंकिंग कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाएगा।