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एंटी-पेपर लीक बिल पास, NTA पर पप्पू यादव का बड़ा सवाल

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर लाया गया ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ लोकसभा से पारित हो गया। इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सरकार ने इसे परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी […]

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  • July 29, 2026 5:23 pm IST, Published 55 minutes ago

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर लाया गया ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ लोकसभा से पारित हो गया। इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सरकार ने इसे परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और नकल व पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि विपक्ष ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर कई सवाल उठाए।

बहस के दौरान पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सरकार को घेरते हुए कहा कि केवल नया कानून बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन संस्थाओं की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए जो परीक्षाओं का संचालन करती हैं। उन्होंने विशेष रूप से NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर एजेंसी के शीर्ष स्तर पर जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई।

NTA की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

लोकसभा में बोलते हुए पप्पू यादव ने कहा कि देश में हर वर्ष करोड़ों छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवेदन करते हैं। उनके अनुसार, इतनी बड़ी परीक्षा व्यवस्था के बावजूद पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार (RTI) और ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी तरीके से लागू किए बिना जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि लगातार पेपर लीक और परीक्षा संबंधी विवाद सामने आ रहे हैं, तो अब तक NTA के शीर्ष अधिकारियों की जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की गई। उन्होंने पूछा कि एजेंसी के चेयरमैन के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

आर्थिक और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल

पप्पू यादव ने परीक्षा शुल्क और एजेंसी के वित्तीय प्रबंधन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि हर वर्ष करोड़ों अभ्यर्थी विभिन्न परीक्षाओं के लिए आवेदन करते हैं और उनसे बड़ी राशि शुल्क के रूप में ली जाती है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि इन संसाधनों का उपयोग किस प्रकार किया जाता है और इसकी निगरानी कौन करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं तो केवल कानून बनाकर समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए संस्थागत सुधार और पारदर्शी जांच व्यवस्था भी जरूरी है।

जांच प्रक्रिया को लेकर उठी मांग

निर्दलीय सांसद ने पेपर लीक मामलों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र जांच व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने पूछा कि विशेष जांच दल (SIT) का गठन कौन करेगा और उसकी जवाबदेही किसके प्रति होगी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में मुख्य आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना था कि यदि दोषियों के खिलाफ समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होगी, तो नए कानून का उद्देश्य भी प्रभावित हो सकता है।

राज्यों के अधिकारों का भी उठाया मुद्दा

पप्पू यादव ने यह भी कहा कि परीक्षा संचालन की वर्तमान व्यवस्था में राज्यों की भूमिका सीमित होती जा रही है। उनके अनुसार, शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में राज्यों की भागीदारी और प्रशासनिक अधिकारों को भी महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को सामान्य प्रशासनिक त्रुटि मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। यह लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है और इसके लिए मजबूत जवाबदेही तंत्र आवश्यक है।

सरकार ने विधेयक का किया बचाव

सरकार की ओर से कहा गया कि ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। सरकार का तर्क था कि यह कानून प्रश्नपत्र लीक, नकल और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करेगा तथा दोषियों के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान करेगा।संसद में चर्चा के दौरान सत्तापक्ष के सांसदों ने कहा कि यह विधेयक युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक है और इससे परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास और मजबूत होगा।

हंगामे के बीच पारित हुआ विधेयक

लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा मंगलवार से शुरू हुई थी। बुधवार को भी इस मुद्दे पर लंबी बहस चली। कार्यवाही की शुरुआत में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विधेयक पर चर्चा आगे बढ़ी।

बहस में कई सांसदों ने अपने-अपने सुझाव दिए। अंततः चर्चा पूरी होने के बाद सदन ने विधेयक को पारित कर दिया। अब इस विधेयक की आगे की संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसके कानून बनने की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा।

परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, युवाओं का भविष्य और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को देखते हुए इस विधेयक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं विपक्ष की ओर से उठाए गए जवाबदेही और संस्थागत सुधार के सवाल भी आने वाले समय में राजनीतिक और नीतिगत बहस का हिस्सा बने रह सकते हैं।

 

 

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