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9 जून 2013: गोवा से उठी वह राजनीतिक लहर जिसने बदल दी भारत की सियासत की दिशा

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति के इतिहास में 9 जून 2013 एक ऐसा दिन माना जाता है जिसने देश की राजनीतिक दिशा और दशा दोनों को प्रभावित किया। इसी दिन गोवा में आयोजित भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की […]

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  • June 9, 2026 6:52 pm IST, Published 1 week ago

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति के इतिहास में 9 जून 2013 एक ऐसा दिन माना जाता है जिसने देश की राजनीतिक दिशा और दशा दोनों को प्रभावित किया। इसी दिन गोवा में आयोजित भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उस समय यह निर्णय केवल एक संगठनात्मक घोषणा भर नहीं था, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीति की नई पटकथा का प्रारंभ माना गया।

बैठक के बाद तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने मीडिया के सामने इस निर्णय की औपचारिक घोषणा की थी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उस समय देश भ्रष्टाचार, नीति-गत ठहराव और आर्थिक चुनौतियों जैसे मुद्दों से जूझ रहा था। ऐसे माहौल में नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने को भाजपा के भीतर नेतृत्व परिवर्तन और नए राजनीतिक विमर्श की शुरुआत के रूप में देखा गया।

गुजरात मॉडल, विकास आधारित राजनीति और मजबूत नेतृत्व की छवि के कारण नरेंद्र मोदी पहले ही राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुके थे। गोवा में लिए गए इस फैसले के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच नया उत्साह देखने को मिला। इसके साथ ही देश के एक बड़े वर्ग में यह उम्मीद जगी कि विकास, सुशासन और निर्णायक नेतृत्व को केंद्र में रखकर राजनीति का नया अध्याय शुरू हो सकता है।

इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और नरेंद्र मोदी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने। यह जीत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं थी, बल्कि भारतीय राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत भी थी। अगले वर्षों में सरकार ने बुनियादी ढांचे, डिजिटल परिवर्तन, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, वित्तीय समावेशन, स्वच्छता अभियान, आत्मनिर्भरता और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका को मजबूत करने जैसे कई क्षेत्रों में व्यापक पहल की।

वर्ष 2019 में भाजपा ने और भी बड़े जनादेश के साथ सत्ता में वापसी की। इसके बाद नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालते हुए देश के लोकतांत्रिक इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल हो गए। उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, रक्षा और कूटनीति के क्षेत्र में नई पहचान बनाने का प्रयास किया।

9 जून 2013 का वह फैसला केवल एक नेता को जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय नहीं था, बल्कि भारतीय राजनीति में नेतृत्व, जनसंपर्क और चुनावी रणनीति के नए युग की शुरुआत थी। गोवा में हुई उस घोषणा ने आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आज भी उसे आधुनिक राजनीतिक इतिहास के एक निर्णायक मोड़ के रूप में याद किया जाता है।

 

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