• होम
  • देश
  • धारा 370 खत्म, पश्चिम बंगाल में बनी सरकार… पीएम मोदी ने डॉ. मुखर्जी का सपना किया साकार

धारा 370 खत्म, पश्चिम बंगाल में बनी सरकार… पीएम मोदी ने डॉ. मुखर्जी का सपना किया साकार

  संबंधित खबरें देश में पहली बार झरनों की गिनती बिहार में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा देश के 9% छात्रों को आता है आत्महत्या का विचार 30 September का इतिहास: आज के दिन भारत और दुनिया में क्या हुआ? बंगाल SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का तत्काल सुनवाई से इनकार ट्रेन यात्रियों के लिए […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • July 6, 2026 10:28 am IST, Published 3 months ago

 

Gauravshali Bharat

लेखक: कपिल मिश्रा, कैबिनेट मंत्री दिल्ली सरकार

प्रखर राष्ट्रवादी, शिक्षाविद और भारतीय जनसंघ संस्थापक डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के उस सपने को पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार ने हकीकत बना दिया है, जिसमें वह जम्मू कश्मीर को देश का अभिन्न अंग मानते थे। उनका पसंदीदा नारा भी था, ‘एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे’। भाजपा की सरकार डॉक्टर मुखर्जी के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा का भी मूर्त रूप दे रही है। दिलचस्प यह कि कर्मभूमि के साथ उनकी जन्म भूमि पश्चिम बंगाल पर भी इस वक्त भगवा ध्वज लहरा रहा है। भाजपा नीत प्रदेश सरकार जनहित के फैसलों के सहारे आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस प्रांत को देश का अभिन्न हिस्सा बनाए रखने का भी अथक प्रयास किया था। इसमें उनको कामयाबी भी मिली थी। असल में 1947 में जब देश का विभाजन हो रहा था, तब कुछ नेता संयुक्त और आजाद बंगाल का विचार रख रहे थे। इसका डॉक्टर मुखर्जी ने कड़ा विरोध किया। उनका मानना था कि ऐसा होने से यह क्षेत्र व्यावहारिक रूप से पाकिस्तान का हिस्सा बन जाएगा। बहरहाल, पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न हिस्सा बना रहा।

जनसंघ की स्थापना (21 अक्टूबर, 1951) के साथ डॉक्टर मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल को ही हिंदुत्व व राष्ट्रवाद का असली प्रयोगशाला बनाया। 1952 के पहले आम चुनाव में जनसंघ ने तीन सीटें जीती और डॉक्टर मुखर्जी खुद दक्षिण कोलकाता से सांसद चुने गए। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म कर और पश्चिम बंगाल से करीब 75 साल बाद भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनवाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रति पूरे देशवासियों की ओर से सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है।

डॉक्टर मुखर्जी जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष राज्य का दर्जा (अनुच्छेद 370 ) के कट्टर विरोधी थे। इसके विरोध में उन्होंने 1953 में बिना परमिट लिए जम्मू-कश्मीर की यात्रा करने का निर्णय लिया। सीमा पार करते समय 11 मई, 1953 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 23 जून 1953 को श्रीनगर की जेल में डॉक्टर मुखर्जी की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। इस रहस्यमयी मौत की जांच तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कभी नहीं कराई। अपने बेटे के मृत्यु का समाचार सुनकर डॉक्टर मुखर्जी की मां जोगमाया देवी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की भूमिका पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया था।

वर्ष 1953 में डॉक्टर मुखर्जी द्वारा अनुच्छेद 370 के खिलाफ पहली यात्रा की गई थी। और लगभग 39 साल बाद वर्ष 1992 में भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में कन्याकुमारी से जम्मू-कश्मीर (लाल चौक) ‘एकता यात्रा’ निकाली गई। इस यात्रा के संयोजक मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे, उस समय आतंकवाद चरम पर होने के बावजूद 26 जनवरी, 1992 को भाजपा नेताओं ने लाल चौक पर तिरंगा झंडा फहराकर जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रखने का अपने अटूट दृढ़ संकल्प को दोहराया। फलस्वरूप जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को 5 अगस्त, 2019 को हटाया गया। यह ऐतिहासिक फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के दृढ़ निश्चय से ही संभव हो सकता है और जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष राज्य का दर्जा समाप्त हो गया। जम्मू-कश्मीर भारत संघ का अभिन्न हिस्सा बन गया। बताते चलें कि भारत के पहले कानून मंत्री संविधान निर्माता डॉक्टर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर भी अनुच्छेद 370 के मुखर विरोधी थे। उन्होंने इसका मसौदा तैयार करने से मना कर दिया था।

अंबेडकर के मासौदा तैयार करने से मना करने पर शेख अब्दुल्ला नेहरू के पास गए और जवाहर लाल नेहरू के निर्देश पर एन गोपालास्वामी अय्यंगर ने मसौदा तैयार किया था। लंबे संघर्ष के बाद मौजूदा भाजपा सरकार ने एक साथ डॉक्टर मुखर्जी और डॉ. अंबेडकर के सपनों को पूरा कर दिया। करीब 70 साल के बाद डॉक्टर मुखर्जी के सपनों का जम्मू-कश्मीर देश के बाकी हिस्सों के साथ विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। मोदी सरकार ने 70 साल की टीस को खत्म कर दिया। केन्द्र के 170 कानून इस क्षेत्र में लागू नहीं होते थे, जो अब लागू हो गए हैं। इसके साथ ही ‘जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वह कश्मीर हमारा है’ का भाजपा का संकल्प पूरा हो गया। यह मोदी सरकार की इस दीर्घकालिक सोच का नतीजा था कि आज कश्मीर भी देश के साथ विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। इस तरह मोदी सरकार ने डॉक्टर मुखर्जी के पहले सपने को धरती के स्वर्ग कश्मीर में उतारकर अपना बड़ा वादा पूरा कर दिया।

अब आते हैं पश्चिम बंगाल पर। इसी धरती पर डॉक्टर मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई, 1901 को हुआ था और उनका बचपन भी यही बीता भी | दक्षिण कोलकाता से वह पहली बार सांसद चुने गए थे। काफी संघर्ष के बाद पश्चिमी बंगाल को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रखने में वे सफल रहे। डॉक्टर मुखर्जी के असमय मृत्यु के बाद पश्चिमी बंगाल में जनसंघ का प्रभाव ठहर सा गया और राजनीतिक रूप से कांग्रेस और वाम दलों का प्रभाव पश्चिमी बंगाल पर रहा। वर्ष 1952 से 1977 तक कांग्रेस का युग रहा। वर्ष 1977-2011 तक वाम मोर्चा का युग रहा। वामपंथियों ने लगभग साढ़े तीन दशक तक पश्चिमी बंगाल पर राज किया। इस कालखंड में बंगाल कंगाल हो गया। नक्सलवाद, खूब पनपा-बढ़ा, उद्योग धंधे चौपट हो गए। उस समय सिंगूर और नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने इस अभेद्य किले को कमजोर कर दिया। इस बीच, ममता बनर्जी कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई और कांग्रेस के तौर पर एक नया विकल्प दिया। वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस गठबंधन ने वाम मोर्चा के 34 साल के शासन को समाप्त कर दिया।

ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी। लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहते हुए ममता बनर्जी ने निरंकुश शासन किया। पश्चिमी बंगाल को बीमारू राज्य की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया। रोहिंग्या और मुसलमानों को बसाकर अपना वोट बैंक खड़ा किया। ममता बनर्जी के कार्यकाल में पश्चिमी बंगाल में खौफ और आतंक का माहौल पैदा हुआ। असंख्य भाजपा कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्या हुई। ममता बनर्जी का लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान के प्रति कोई आस्था नहीं थी। वस्तुतः वह नक्सलवाद की प्रतिमूर्ति थी और उसी एजेंडे पर काम कर रही थी। पश्चिम बंगाल में जनसंघ के जरिए जिस बीज को डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी बो कर गए थे, वह अंकुरित होते ही आंधियों और तूफानों से लड़ रहा था और हार न मानने की जिद पर आगे बढ़ने का निरंतर प्रयास कर रहा था। वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने मात्र दो सीटें जीती और 17 फीसदी वोट हासिल किया। वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 3 सीटें मिलीं।

2019 का लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए टर्निंग प्वाइंट रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के कुशल नेतृत्व में पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की 42 में से 18 सीटें जीतकर अपने वोट शेयर को 40 फीसदी तक बढ़ाया, इसके बाद पश्चिम बंगाल की जनता का आत्मबल बढ़ा और भाजपा कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास बढ़ा। वर्ष 2021 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल के रूप में अपने आपको स्थापित कर लिया। पश्चिमी बंगाल में भाजपा का चुनावी इतिहास शून्य से शुरू होकर शिखर तक पहुंचने का लंबा और संघर्षपूर्ण सफर रहा है। पार्टी ने लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार पहली बार लगभग 77 साल बाद हासिल की है। कुल 294 विधानसभा सीट में से 207 सीटों पर जीत दर्ज कर शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सरकार बनी। यह सब संभव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन में ही संभव हो सका, जिन्होंने डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को धरातल पर उतारने के लिए दिन रात काम किया और करोड़ों कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया।

 

Advertisement