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दिल्ली कूच से पहले खनौरी बॉर्डर सील, पुलिस ने संभाला मोर्चा

किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद पंजाब-हरियाणा सीमा पर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। खनौरी बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और हरियाणा पुलिस ने दाता सिंह वाला के पास बैरिकेडिंग बढ़ाते हुए दिल्ली की ओर जाने वाले रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया है। किसान […]

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  • August 16, 2026 10:35 am IST, Published 34 minutes ago

किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद पंजाब-हरियाणा सीमा पर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। खनौरी बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और हरियाणा पुलिस ने दाता सिंह वाला के पास बैरिकेडिंग बढ़ाते हुए दिल्ली की ओर जाने वाले रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया है। किसान संगठनों की ओर से प्रस्तावित पैदल मार्च को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) की ओर से दिल्ली कूच का ऐलान किए जाने के बाद बॉर्डर पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में पैदल मार्च की तैयारी की जा रही है। आंदोलनकारियों के संभावित जमावड़े और आगे बढ़ने की कोशिश को देखते हुए पुलिस ने सीमा क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है।

दाता सिंह वाला के आसपास पहले से मौजूद सुरक्षा व्यवस्था को भी और मजबूत किया गया है। पुलिस ने सड़क पर बैरिकेड लगाकर दिल्ली की तरफ जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया है। इसके अलावा संभावित आवाजाही वाले रास्तों पर भी नजर रखी जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी स्थिति में भीड़ को नियंत्रित रखा जाए और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने न पाए।

किसानों के प्रस्तावित मार्च को लेकर खनौरी बॉर्डर पर तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस बल को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां किसान नेताओं की गतिविधियों और बॉर्डर की स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं। वहीं किसान संगठनों की ओर से अपने कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

किसानों और प्रशासन के बीच पहले भी विभिन्न मुद्दों को लेकर टकराव की स्थिति बनती रही है। ऐसे में दिल्ली कूच के नए ऐलान के बाद दोनों पक्षों की गतिविधियों पर नजर बनी हुई है। प्रशासन की प्राथमिकता जहां सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना है, वहीं किसान संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं।

जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में प्रस्तावित पैदल मार्च को लेकर किसानों के बीच भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए मार्च करना चाहते हैं। दूसरी ओर पुलिस ने किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही सुरक्षा इंतजाम मजबूत कर दिए हैं।

खनौरी बॉर्डर लंबे समय से किसान आंदोलन के प्रमुख केंद्रों में रहा है। यहां समय-समय पर किसानों के प्रदर्शन और पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई को लेकर तनाव की स्थिति बनती रही है। दिल्ली की ओर जाने वाले रास्ते को बंद किए जाने से एक बार फिर यह क्षेत्र राजनीतिक और किसान आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों के केंद्र में आ गया है।

बॉर्डर पर बैरिकेडिंग के साथ पुलिस ने वाहनों और लोगों की आवाजाही पर भी निगरानी बढ़ाई है। प्रशासन की ओर से संभावित भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त बल की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा अधिकारियों की कोशिश है कि किसी भी अप्रिय स्थिति को शुरुआत में ही नियंत्रित किया जा सके।

वहीं किसान संगठनों की ओर से कहा जा रहा है कि उनका आंदोलन अपनी मांगों को लेकर है और वे सरकार पर दबाव बनाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करना चाहते हैं। किसान नेताओं की आगे की रणनीति और मार्च के स्वरूप को लेकर अब सभी की निगाहें खनौरी बॉर्डर पर टिकी हुई हैं।

आने वाले समय में स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि किसान मार्च किस तरह आगे बढ़ता है और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं। यदि किसानों की भीड़ बॉर्डर की ओर बढ़ती है तो पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी। वहीं किसानों के लिए भी शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखना महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल खनौरी बॉर्डर पर सुरक्षा कड़ी है और दाता सिंह वाला के पास दिल्ली जाने वाला रास्ता बंद कर दिया गया है। पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है, जबकि किसान संगठन प्रस्तावित पैदल मार्च की तैयारी में जुटे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि दिल्ली कूच का कार्यक्रम किस रूप में आगे बढ़ता है और इसके बाद बॉर्डर पर हालात क्या रुख लेते हैं।

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