नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। दिल्ली स्थित ‘सदैव अटल’ स्मारक पर आयोजित प्रार्थना सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस दौरान नेताओं ने वाजपेयी की स्मृति को नमन करते हुए उनके सार्वजनिक जीवन और देश के प्रति योगदान को याद किया।
पुण्यतिथि के अवसर पर ‘सदैव अटल’ स्मारक पर सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों का पहुंचना शुरू हो गया था। कार्यक्रम के दौरान वातावरण गंभीर और भावुक नजर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य नेताओं ने स्मारक पर पुष्प अर्पित कर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी। प्रार्थना सभा में देश के लिए वाजपेयी के योगदान और उनके व्यक्तित्व को याद किया गया।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी ‘सदैव अटल’ स्मारक पहुंचे और उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने वाजपेयी के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। वाजपेयी की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं और अन्य गणमान्य लोगों ने भी उन्हें याद किया।
अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल रहे, जिनका प्रभाव दलगत राजनीति से कहीं आगे तक माना जाता है। वे तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने। उनके लंबे राजनीतिक जीवन में संसद से लेकर सरकार और विपक्ष तक कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं रहीं। अपनी वक्तृत्व क्षमता, राजनीतिक समझ और अलग-अलग विचारधाराओं के लोगों के साथ संवाद स्थापित करने की क्षमता के कारण उनकी एक अलग पहचान बनी।
वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख संस्थापकों में शामिल थे और पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे लंबे समय तक संसद में सक्रिय रहे और विपक्ष में रहते हुए भी विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराते रहे। प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान देश ने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक फैसलों का दौर देखा।
वाजपेयी का व्यक्तित्व केवल एक राजनेता तक सीमित नहीं था। वे हिंदी के लोकप्रिय कवि और लेखक भी थे। उनकी कविताओं और भाषणों में राष्ट्र, लोकतंत्र, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं की झलक दिखाई देती थी। राजनीति में उनके भाषणों को आज भी प्रभावशाली वक्तृत्व के उदाहरण के तौर पर याद किया जाता है।
‘सदैव अटल’ स्मारक दिल्ली में वाजपेयी की स्मृति को समर्पित है। हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर यहां विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और उनके समर्थक पहुंचकर श्रद्धांजलि देते हैं। इस अवसर पर वाजपेयी के सार्वजनिक जीवन से जुड़े योगदान को याद किया जाता है और उनके विचारों को सम्मान दिया जाता है।
अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त 2018 को हुआ था। इसके बाद से उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें याद किया जाता है। उनके समर्थक और राजनीतिक कार्यकर्ता उनके जीवन, विचारों और देश सेवा को स्मरण करते हैं। वाजपेयी की राजनीतिक शैली में संवाद और सहमति की राजनीति को विशेष महत्व दिया जाता था।
उनकी विरासत भारतीय राजनीति में आज भी चर्चा का विषय है। सत्ता में रहते हुए उन्होंने जहां कई महत्वपूर्ण फैसले लिए, वहीं विपक्ष के साथ संवाद और लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान को लेकर भी उनकी राजनीतिक छवि अलग रही। यही वजह है कि अलग-अलग राजनीतिक विचार रखने वाले नेता भी कई अवसरों पर उनके व्यक्तित्व और योगदान को सम्मान के साथ याद करते हैं।
पुण्यतिथि पर ‘सदैव अटल’ में आयोजित प्रार्थना सभा इसी सम्मान और स्मरण का प्रतीक रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, पूर्व राष्ट्रपति और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित कर अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति को नमन किया। कार्यक्रम के दौरान देश के लिए उनके योगदान और उनकी राजनीतिक विरासत को याद किया गया।