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ओडिशा DGP नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

UPSC को 18 अगस्त तक नाम फाइनल करने से रोका नई दिल्ली। ओडिशा के नए पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से कहा कि वह 18 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई तक DGP पद के लिए संभावित अधिकारियों […]

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  • August 14, 2026 10:07 am IST, Published 38 minutes ago

UPSC को 18 अगस्त तक नाम फाइनल करने से रोका

नई दिल्ली। ओडिशा के नए पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से कहा कि वह 18 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई तक DGP पद के लिए संभावित अधिकारियों के नामों को अंतिम रूप न दे।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें जस्टिस जायमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं, ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए UPSC और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में किसी भी तरह की ‘पिछले दरवाजे से नियुक्ति’ स्वीकार नहीं की जाएगी।

18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने UPSC के वकील से कहा कि अगली सुनवाई तक DGP चयन प्रक्रिया में कोई अंतिम निर्णय न लिया जाए। कोर्ट ने कहा कि मामले पर 18 अगस्त को फिर सुनवाई होगी और उस दिन आयोग को अदालत की सहायता करनी होगी।

सुनवाई के दौरान UPSC की ओर से पेश वकील ने भी अदालत को भरोसा दिलाया कि अगली तारीख तक इस मुद्दे पर कोई बैठक नहीं बुलाई जाएगी।

क्या है पूरा विवाद?

याचिका में आरोप लगाया गया है कि ओडिशा सरकार 2006 के प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किए बिना DGP पद के लिए संभावित अधिकारियों की सूची में एक जूनियर अधिकारी को शामिल करने की कोशिश कर रही है।

याचिकाकर्ता का दावा है कि DGP की नियुक्ति में वरिष्ठता और पात्रता के तय नियमों का पालन किया जाना चाहिए।

ओडिशा के मौजूदा DGP वाईबी खुरानिया 16 अगस्त को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में नए DGP की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर यह मामला महत्वपूर्ण हो गया है।

प्रकाश सिंह मामले में क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने?

सुप्रीम कोर्ट ने 2006 के प्रकाश सिंह मामले में पुलिस सुधारों को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके तहत राज्य सरकार को DGP के चयन के लिए UPSC द्वारा तैयार किए गए पैनल में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों में से किसी एक को नियुक्त करना होता है।

नियम के मुताबिक UPSC आम तौर पर तीन वरिष्ठ और पात्र अधिकारियों का पैनल तैयार करता है। इसके बाद राज्य सरकार इन्हीं अधिकारियों में से किसी एक को DGP नियुक्त करती है।

चयन में अधिकारी की सेवा अवधि, बेदाग एवं उत्कृष्ट रिकॉर्ड और पुलिस बल का नेतृत्व करने का अनुभव जैसे मानकों को ध्यान में रखा जाता है।

DGP का कार्यकाल कम से कम दो साल

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, DGP नियुक्त किए गए अधिकारी को कम से कम दो साल का कार्यकाल दिया जाना चाहिए। उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख चाहे जो भी हो, केवल सेवानिवृत्ति नजदीक होने के आधार पर उन्हें हटाया नहीं जाना चाहिए।

इसी नियम को लेकर ओडिशा में नए DGP के चयन पर विवाद खड़ा हुआ है।

चिदंबरम ने उठाया वरिष्ठता का मुद्दा

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने अदालत को बताया कि बुधवार को ओडिशा में ADGP रैंक के एक अधिकारी को पदोन्नति दी गई है।

पीठ ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि मामले से प्रभावित किसी अधिकारी ने अब तक अदालत का रुख नहीं किया है।

वहीं, ओडिशा सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कोई उल्लंघन नहीं किया है।

इस पर पीठ ने राज्य सरकार से मामले की स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। उस दिन अदालत यह देखेगी कि ओडिशा में DGP चयन प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित नियमों के अनुरूप चल रही है या नहीं।

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