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SIR विवाद के बीच रेखा गुप्ता बोलीं, आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए जा रहे हैं

निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेदों और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। आयोग ने हाल में स्पष्ट किया था कि विभिन्न मुद्दों पर अधिकारियों की राय या टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन अंतिम निर्णय आयोग के

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Gauravshali Bharat News
  • September 27, 2026 12:30 pm IST, Published 43 minutes ago

नयी दिल्लीः दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ऐसे मुद्दे उठाकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है, जिनका कोई ठोस आधार नहीं है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसका उद्देश्य लोगों का ध्यान सरकार के विकास कार्यों और विपक्ष की कथित विफलताओं से हटाकर दूसरे विवादों की ओर ले जाना है।

रेखा गुप्ता ने कहा कि विपक्ष लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगा रहा है और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। उन्होंने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया नियमों और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार चल रही है। उनके मुताबिक, आयोग से जुड़े मामलों में अंतिम फैसले सामूहिक रूप से लिए जा रहे हैं।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेदों और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। आयोग ने हाल में स्पष्ट किया था कि विभिन्न मुद्दों पर अधिकारियों की राय या टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन अंतिम निर्णय आयोग के स्तर पर सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि SIR समेत मतदाता सूची से संबंधित फैसलों को सभी चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त है।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उठे सवाल भी महत्वपूर्ण हैं। दिल्ली में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियों की पहचान की गई और संबंधित लोगों को सत्यापन के लिए नोटिस जारी किए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होना अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का अर्थ नहीं है।  मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का नाम भी इस प्रक्रिया के दौरान विसंगति वाले रिकॉर्ड में सामने आया था। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनकी प्रविष्टि को वैध कर दिया गया और उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में बनाए रखने की बात कही गई।

इसी बीच, निर्वाचन आयोग ने आंतरिक कामकाज को लेकर सामने आई चर्चाओं पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के अनुसार, किसी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। आयोग ने कहा कि व्यक्तिगत टिप्पणियों या आपत्तियों को अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रेखा गुप्ता ने अपने बयान में विपक्ष से जुड़े आरोपों को विकास और शासन के मुद्दों से जोड़ते हुए कहा कि सरकार का ध्यान दिल्ली के विकास कार्यों पर केंद्रित है। उन्होंने संकेत दिया कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय जनता के सामने वास्तविक मुद्दों और सरकारी कामकाज पर चर्चा होनी चाहिए।

उनका बयान दिल्ली की राजनीति में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर जारी बहस का हिस्सा है। वहीं आयोग अपनी निर्णय प्रक्रिया को कानून, नियमों और सामूहिक सहमति के अनुरूप बता रहा है।

 

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