तमिलनाडु सरकार ने विमानन क्षेत्र को राहत देते हुए एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमानों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन पर मूल्य वर्धित कर(VAT) की दरों में कटौती की है। इस फैसले के तहत चेन्नई एयरपोर्ट पर एटीएफ पर लगने वाला वैट 29 प्रतिशत से घटाकर 16 प्रतिशत करदिया गया है। वहीं, राज्य के अन्य हवाई अड्डों पर एटीएफ पर वैट की दर घटाकर 1 प्रतिशत निर्धारित की गई है। सरकार के इस कदम कोविमानन उद्योग के लिए अहम राहत के रूप में देखा जा रहा है।
तमिलनाडु सरकार के फैसले का केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू और इंडिगो एयरलाइंस ने स्वागत किया है। इंडिगो ने इस निर्णयके लिए सरकार के प्रति आभार जताते हुए ‘थैंक यू’ कहा। विमानन क्षेत्र में ईंधन की लागत एक बड़ा खर्च होती है। ऐसे में एटीएफ पर कर कमहोने से एयरलाइंस के परिचालन खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है। इस फैसले से राज्य में हवाई सेवाओं के संचालन और विमाननकारोबार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, वैट में कटौती की नई दरें 1 नवंबर 2026 से लागू होंगी और 31 अक्टूबर 2027 तक प्रभावी रहेंगी। यानी विमानन कंपनियों को एक साल तक इस कर राहत का लाभ मिल सकेगा। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब विमाननकंपनियां ईंधन की बढ़ती कीमतों और परिचालन खर्च के दबाव का सामना कर रही हैं।
एटीएफ किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असरएयरलाइंस के बजट और उड़ानों की व्यावसायिक व्यवहार्यता पर पड़ता है। तमिलनाडु में पहले लागू 29 प्रतिशत वैट की दर विमानन कंपनियों केलिए खर्च बढ़ाने वाली प्रमुख वजहों में शामिल थी। नई दरें लागू होने से चेन्नई के साथ-साथ कोयंबटूर, मदुरै और तिरुचिरापल्ली जैसे शहरों केहवाई अड्डों पर ईंधन भरवाना अपेक्षाकृत किफायती हो सकता है।
इस फैसले का एक बड़ा उद्देश्य राज्य में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करना भी है। विमानन कंपनियों की परिचालन लागत कम होने पर उनकेलिए नए मार्गों पर उड़ानें शुरू करना और मौजूदा मार्गों पर सेवाओं की संख्या बढ़ाना व्यावसायिक रूप से अधिक सुविधाजनक हो सकता है।इससे राज्य के अलग-अलग शहरों के बीच संपर्क बेहतर होने के साथ पर्यटन, व्यापार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलनेकी संभावना है।
इंडिगो ने इस फैसले का स्वागत करते हुए तमिलनाडु सरकार के प्रति आभार जताया है। एयरलाइन का मानना है कि इस तरह के नीतिगत कदमविमानन क्षेत्र को मजबूती देने और हवाई संपर्क बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने भी इस पहल कीसराहना की है। विमानन उद्योग लंबे समय से विभिन्न राज्यों में एटीएफ पर लगने वाले करों को तर्कसंगत बनाने की मांग करता रहा है, क्योंकिअलग-अलग कर दरों के कारण एयरलाइंस के खर्च और प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ता है।
हालांकि, वैट में कटौती के बाद हवाई टिकटों की कीमतें तत्काल कम होंगी, इसकी गारंटी नहीं है। टिकटों का किराया तय करते समयएयरलाइंस ईंधन के अलावा विमान रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन, हवाई अड्डों के शुल्क और यात्रियों की मांग जैसे कई पहलुओं पर विचारकरती हैं। इसलिए कर में मिली राहत का कितना हिस्सा यात्रियों तक पहुंचेगा, यह संबंधित एयरलाइंस की व्यावसायिक रणनीति पर निर्भरकरेगा।
इसके बावजूद तमिलनाडु सरकार का यह फैसला विमानन क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। खास तौर पर चेन्नई के बाहर स्थितहवाई अड्डों पर वैट को 1 प्रतिशत तक लाने से क्षेत्रीय उड़ानों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। यदि एयरलाइंस इस राहत का उपयोग नई सेवाएं शुरू करने और मौजूदा उड़ानों को मजबूत करने में करती हैं, तो इससे यात्रियों को अधिक विकल्प मिल सकते हैं।
कुल मिलाकर, एटीएफ पर वैट घटाने का निर्णय विमानन कंपनियों के खर्च को कम करने, क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने और राज्य के पर्यटन एवंव्यापार को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नई दरें लागू होने के बाद एयरलाइंस अपनी सेवाओं में क्या बदलाव करती हैं और इस फैसले का लाभ यात्रियों को किस हद तक मिलता है।