जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की है। इस मुलाकात को केंद्र शासित प्रदेश में मंत्रिमंडल के संभावित फेरबदल और विस्तार की चर्चाओं के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।मुख्यमंत्री ने मुलाकात के बाद स्पष्ट किया कि उपराज्यपाल के साथ कैबिनेट में बदलाव और उसके विस्तार को लेकर चर्चा हुई है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं कि आने वाले दिनों में सरकार के मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं या मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव हो सकता है।
उमर अब्दुल्ला और मनोज सिन्हा के बीच हुई इस मुलाकात पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। जम्मू-कश्मीर में सरकार के कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से मुख्यमंत्री तथा उपराज्यपाल के बीच संवाद को अहम माना जाता है। खासकर तब, जब मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं चल रही हों। मुख्यमंत्री के बयान से यह संकेत मिला है कि कैबिनेट में फेरबदल और विस्तार का विषय बातचीत काहिस्सा रहा। हालांकि, अभी तक किसी नए मंत्री के नाम, विभागों में बदलाव या मंत्रिमंडल के विस्तार की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया है कि मंत्रिमंडल में बदलाव की प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जा सकता है। उन्होंने उपराज्यपाल से अगले सप्ताह की शुरुआत में शपथ ग्रहण समारोह के लिए समय निर्धारित करने का अनुरोध किया है। उमर अब्दुल्ला के मुताबिक, अगले सप्ताह के शुरुआती दो से तीन दिनों में मंत्रिमंडल का विस्तार और फेरबदल किए जाने की संभावना है। अब इस प्रक्रिया की अगली औपचारिक कार्रवाई उपराज्यपाल की ओर से समय तय किए जाने के बाद आगे बढ़ेगी।
इस घटनाक्रम का एक अहम पहलू यह है कि मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के चयन को लेकर पार्टी के भीतर चल रही हलचल पर भी अपनी स्थिति साफकर दी है। उन्होंने बताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला के साथ विचार-विमर्श के बाद मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री के इस बयान से स्पष्ट है कि नेतृत्व अब इस मामले में किसी नए सुझाव या दबाव के बजाय पहले से लिए गए फैसले के अनुसार आगे बढ़ना चाहता है।
उमर अब्दुल्ला ने पार्टी के विधायकों और मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं से धैर्य बनाए रखने की अपील भी की है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार फोन कॉल, व्हाट्सऐप संदेश और लंबे पत्र मिल रहे हैं, जिनमें नेता अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने ऐसे नेताओं को संदेश भेजने और उनसे या फारूक अब्दुल्ला से बार-बार संपर्क करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने साफ किया कि किसे मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी,इस बारे में फैसला किया जा चुका है। इसलिए अब किसी तरह की पैरवी करने से निर्णय बदलने की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।
जम्मू-कश्मीर में मंत्रिमंडल का यह संभावित विस्तार इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सरकार में नए नेताओं को जिम्मेदारी देने और मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बदलाव का रास्ता खुल सकता है। खाली मंत्री पदों को भरे जाने की संभावना के बीच राजनीतिक हलकों में यह जानने की उत्सुकता है कि किन विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। हालांकि, मुख्यमंत्री ने संभावित मंत्रियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।ऐसे में अंतिम तस्वीर शपथ ग्रहण समारोह और आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने अन्य मुद्दों पर भी चर्चा करने और उनकी राय लेने की बात कही। उन्होंने बताया कि काफी समयसे दोनों के बीच मुलाकात नहीं हुई थी। उपराज्यपाल के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेना भी मुलाकात की वजहों में शामिल था। इस तरहबैठक में प्रशासनिक संवाद के साथ-साथ मंत्रिमंडल के विस्तार जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक विषय पर भी चर्चा हुई।
फिलहाल जम्मू-कश्मीर की राजनीति में सबकी निगाहें अगले सप्ताह होने वाली संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि तय समय के अनुसार मंत्रिमंडल का विस्तार होता है, तो सरकार की टीम में नए चेहरे दिखाई दे सकते हैं और कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियां भी बदल सकती हैं।मुख्यमंत्री के बयान से यह संकेत जरूर मिला है कि फैसला अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन मंत्रियों के नाम और विभागों के बंटवारे को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा।