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कैंसर की जेनेटिक जांच में दुनिया भर में भारी असमानता

कम और मध्यम आय वाले देशों में पहुंच बेहद कम नई दिल्ली। दुनिया भर में कैंसर की आनुवंशिक जांच और जांच के आधार पर उपचार की सुविधा में बड़ी असमानता सामने आई है। द लैंसेट ऑन्कोलॉजी की नई रिपोर्ट के अनुसार, कैंसर के इलाज में जीन आधारित जांच और आधुनिक उपचार की सुविधाएं अमीर देशों […]

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Gauravshali Bharat News
  • September 26, 2026 10:00 am IST, Published 1 hour ago

कम और मध्यम आय वाले देशों में पहुंच बेहद कम

नई दिल्ली। दुनिया भर में कैंसर की आनुवंशिक जांच और जांच के आधार पर उपचार की सुविधा में बड़ी असमानता सामने आई है। द लैंसेट ऑन्कोलॉजी की नई रिपोर्ट के अनुसार, कैंसर के इलाज में जीन आधारित जांच और आधुनिक उपचार की सुविधाएं अमीर देशों की तुलना में कम और मध्यम आय वाले देशों में काफी सीमित हैं।

रिपोर्ट में कैंसर की आनुवंशिक जांच से जुड़े शोध में भी वैश्विक असमानता की ओर ध्यान दिलाया गया है। शोधकर्ताओं ने क्लिनिकल ट्रायल, जीनोमिक डाटासेट और राष्ट्रीय कैंसर कार्यक्रमों से जुड़े वैश्विक आंकड़ों का विश्लेषण किया है।

बायोमार्कर आधारित ट्रायल में बड़ा अंतर

रिपोर्ट के मुताबिक, बायोमार्कर आधारित कैंसर क्लिनिकल ट्रायल में केवल करीब 2 प्रतिशत परीक्षण कम और मध्यम आय वाले देशों में किए जाते हैं। इसके मुकाबले अमीर देशों की हिस्सेदारी करीब 81 प्रतिशत है। इससे कैंसर के जीन आधारित उपचार और उससे जुड़े शोध में देशों के बीच मौजूद अंतर का पता चलता है।

कैंसर की दवाओं पर बढ़ रहा खर्च

विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कैंसर की दवाओं पर होने वाला वैश्विक खर्च करीब 75 प्रतिशत बढ़ा है। वर्ष 2024 में कैंसर की दवाओं पर दुनिया भर में लगभग 252 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च होने का अनुमान है। यह खर्च वर्ष 2029 तक बढ़कर करीब 441 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है।

हर साल 70 से 80 लाख मरीजों को जरूरत

शोधकर्ताओं का अनुमान है कि दुनिया भर में हर साल कैंसर से पीड़ित करीब 70 से 80 लाख मरीजों को मानक स्तर की आणविक जांच की जरूरत होती है। हालांकि, इन जांचों की सुविधा सभी देशों में समान रूप से उपलब्ध नहीं है। कम और मध्यम आय वाले देशों में मरीजों के लिए ऐसी जांच तक पहुंच सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

ओवेरियन कैंसर में भी सामने आया अंतर

रिपोर्ट में ओवेरियन कैंसर का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि हर साल करीब 3.14 लाख महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े जीन की जांच के लिए पात्र होती हैं। इसके बावजूद लगभग आधी महिलाओं को यह जांच उपलब्ध नहीं हो पाती।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस अंतर की प्रमुख वजह कम और मध्यम आय वाले देशों में आनुवंशिक जांच की सीमित उपलब्धता है। रिपोर्ट ने कैंसर के इलाज में समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जीन आधारित जांच और उपचार सुविधाओं को अधिक व्यापक बनाने की जरूरत पर जोर दिया है।

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