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वंदे मातरम विवाद: जयराम रमेश ने सोनिया गांधी का बचाव किया

नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अपनी पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का बचाव करते हुए भाजपा के आरोपों को खारिज किया है। रमेश ने कहा कि सोनिया गांधी ने ‘वंदे मातरम’ […]

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  • August 16, 2026 7:16 am IST, Published 12 seconds ago

नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अपनी पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का बचाव करते हुए भाजपा के आरोपों को खारिज किया है। रमेश ने कहा कि सोनिया गांधी ने ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण गायन को रोकने की कोशिश नहीं की थी। उनके अनुसार, कार्यक्रम के दौरान सोनिया गांधी के खड़े होने को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक आरोप वास्तविक स्थिति से अलग हैं।

यह विवाद उस कार्यक्रम के बाद सामने आया जिसमें लाल किले की प्राचीर पर पहली बार ‘वंदे मातरम’ का पूरा गायन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय गीत की रचना और उसके ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करने के लिए किया गया था। इसी आयोजन के दौरान कांग्रेस नेताओं से जुड़ा एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। भाजपा नेताओं ने वीडियो के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए, जबकि कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।

जयराम रमेश ने क्या कहा?

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सोनिया गांधी का उद्देश्य ‘वंदे मातरम’ के गायन को रोकना नहीं था। उनका कहना था कि जिस घटना को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, उसकी व्याख्या राजनीतिक नजरिए से की जा रही है।

रमेश के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान सोनिया गांधी काफी देर तक खड़ी थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि सोनिया गांधी ने अपने लिए कुर्सी लाने के लिए कहा था। कांग्रेस नेता ने इस घटनाक्रम को ‘वंदे मातरम’ के अपमान से जोड़ने को अनुचित बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं की राष्ट्रीय गीत के प्रति अपनी ऐतिहासिक भूमिका रही है। ऐसे में किसी एक वीडियो या कार्यक्रम के दौरान सामने आए दृश्य के आधार पर पूरे राजनीतिक दल की राष्ट्रभक्ति पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

लाल किले पर हुआ विशेष आयोजन

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ से जुड़े कार्यक्रम का आयोजन लाल किले की प्राचीर पर किया गया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी रही। इस दौरान ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंदों का गायन किया गया और इसके बाद राष्ट्रगान हुआ।

कार्यक्रम राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित समारोहों की श्रृंखला से जुड़ा था। लाल किले की प्राचीर को फूलों से सजाया गया था। राष्ट्रीय ध्वज के साथ हिंदी और रोमन लिपि में ‘वंदे मातरम’ लिखा गया था, जिससे कार्यक्रम को विशेष राष्ट्रीय स्वरूप देने की कोशिश की गई।

आयोजन के दौरान राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के माध्यम से देश की स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को याद किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक सफर और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका को भी सामने रखा गया।

भाजपा ने लगाए गंभीर आरोप

विवाद की शुरुआत भाजपा नेताओं की ओर से कांग्रेस पर लगाए गए आरोपों से हुई। भाजपा ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण के गायन को लेकर आपत्ति जताई गई थी।

भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने राष्ट्रीय गीत के पूरे स्वरूप को लेकर असहजता दिखाई। पार्टी नेताओं ने इसे राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दे के रूप में पेश किया। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच बहस देखने को मिली।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह केवल किसी कार्यक्रम के प्रोटोकॉल का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के सम्मान से जुड़ा विषय है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से इस मामले पर स्पष्टीकरण देने और जनता से माफी मांगने की मांग की।

भाजपा संगठन की ओर से भी कार्यक्रम की वीडियो क्लिप साझा कर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए गए। पार्टी नेताओं का कहना था कि राष्ट्रीय गीत के दौरान सभी लोगों से सम्मान और अनुशासन की अपेक्षा की जाती है।

कांग्रेस ने आरोपों को किया खारिज

कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को स्वीकार नहीं किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा इस पूरे मामले को राजनीतिक विवाद में बदलने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि किसी कार्यक्रम में मौजूद किसी व्यक्ति के कुछ क्षणों को आधार बनाकर पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।

जयराम रमेश ने विशेष रूप से सोनिया गांधी का बचाव करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि सोनिया गांधी कार्यक्रम में सम्मानपूर्वक मौजूद थीं और लंबे समय तक खड़ी भी रहीं।

कांग्रेस नेता ने यह सवाल भी उठाया कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक खड़े रहने में असुविधा होती है और वह बैठने के लिए कुर्सी मांगता है, तो इसे राष्ट्रीय गीत के विरोध के तौर पर कैसे देखा जा सकता है। उनके अनुसार, भाजपा इस सामान्य घटनाक्रम को राजनीतिक मुद्दा बना रही है।

वंदे मातरम’ का ऐतिहासिक महत्व

‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रभावशाली गीतों में शामिल रहा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों में राष्ट्रीय चेतना पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समय के साथ यह गीत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की पहचान से जुड़ गया।

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर ‘वंदे मातरम’ का इस्तेमाल किया गया। इसके शब्दों में मातृभूमि के प्रति सम्मान और समर्पण की भावना दिखाई देती है। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण आज भी राष्ट्रीय गीत को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संवेदनाएं जुड़ी हुई हैं।

हालांकि, ‘वंदे मातरम’ के विभिन्न छंदों और इसके पूर्ण स्वरूप को लेकर समय-समय पर राजनीतिक तथा वैचारिक बहस होती रही है। इसी वजह से इसके गायन से जुड़ा कोई भी विवाद तेजी से राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन जाता है।

1937 की कांग्रेस कार्यसमिति बैठक का भी जिक्र

जयराम रमेश ने विवाद के बीच कांग्रेस के इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत और सी. राजगोपालाचारी जैसे प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई थी।

कांग्रेस महासचिव ने इस ऐतिहासिक संदर्भ के जरिए यह बताने की कोशिश की कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस के भीतर भी लंबे समय से विचार-विमर्श होता रहा है। उनके मुताबिक, मौजूदा विवाद को केवल आज की राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके ऐतिहासिक संदर्भ को भी समझना जरूरी है।

कार्यक्रम पुस्तिकाओं में सभी छह छंद

लाल किले पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, अतिथियों के लिए जारी कार्यक्रम पुस्तिकाओं में ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंद शामिल किए गए थे। कार्यक्रम के दौरान पूरे गीत का गायन किया गया और उसके बाद राष्ट्रगान हुआ।

ध्वजारोहण के बाद दो एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने कार्यक्रम स्थल के ऊपर पुष्पवर्षा भी की। इनमें से एक हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज और दूसरा ‘वंदे मातरम’ अंकित ध्वज लेकर उड़ान भर रहा था। इस तरह कार्यक्रम में राष्ट्रीय प्रतीकों और देशभक्ति से जुड़े दृश्यात्मक तत्वों को प्रमुखता दी गई।

आयोजन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक यात्रा और स्वतंत्रता आंदोलन में उसके योगदान को याद करना था। लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कांग्रेस नेताओं से जुड़े कथित वीडियो ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया।

विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बना

‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुई बहस अब केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही है। भाजपा इसे कांग्रेस की विचारधारा और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति उसके रुख से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए विवाद को बढ़ाने का आरोप लगा रही है।

दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला ऐसे समय में सामने आया है जब राष्ट्रीय प्रतीकों, स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और देशभक्ति से जुड़े मुद्दे पहले से ही राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि एक कथित वीडियो और उसके राजनीतिक अर्थ को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। भाजपा जहां इसे कांग्रेस नेतृत्व की कथित आपत्ति के प्रमाण के रूप में देख रही है, वहीं कांग्रेस इसे गलत व्याख्या बता रही है।

आगे और बढ़ सकती है राजनीतिक बहस

वंदे मातरम के पूर्ण गायन को लेकर सामने आए इस विवाद के आने वाले दिनों में और राजनीतिक रूप लेने की संभावना है। भाजपा इस मुद्दे को राष्ट्रीय सम्मान और अनुशासन से जोड़कर कांग्रेस पर हमला कर सकती है, जबकि कांग्रेस अपने नेताओं की स्थिति स्पष्ट करते हुए भाजपा पर राजनीतिक ध्रुवीकरण का आरोप लगा सकती है।

राजनीतिक विवाद के बीच ‘वंदे मातरम’ के इतिहास और उसके सम्मान का सवाल भी चर्चा में है। राष्ट्रीय गीत स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण विरासत है और इसके साथ करोड़ों भारतीयों की भावनाएं जुड़ी हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप से अलग इसके ऐतिहासिक महत्व को समझना भी जरूरी है।

फिलहाल जयराम रमेश का बयान कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी के बचाव के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा के आरोप और कांग्रेस का जवाब आने के बाद यह मुद्दा संसद से लेकर सोशल मीडिया तक राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों प्रमुख दल इस विवाद को आगे किस तरह उठाते हैं और क्या इस मामले में कोई नया स्पष्टीकरण सामने आता है।

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