नई दिल्ली में सरकार ने शराब की खुदरा बिक्री से जुड़े सरकारी उपक्रमों के वित्तीय रिकॉर्ड की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक राजस्व से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकार ने हाल ही में यह पाया है कि शराब बिक्री से संबंधित कुछ सरकारी संस्थानों में लंबे समय से खातों का नियमित मिलान नहीं हुआ है। इससे वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं और सरकारी राजस्व को नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
दिल्ली में शराब की रिटेल बिक्री कई सरकारी उपक्रमों के माध्यम से संचालित होती है, जिनमें दिल्ली उपभोक्ता सहकारी थोक भंडार (DCCWS), दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC), दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (DSCSC) और दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (DSIIDC) शामिल हैं। इन संस्थानों के अंतर्गत शहर के विभिन्न हिस्सों में शराब की दुकानें संचालित की जाती हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि इन सभी संस्थाओं के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जाए। इसमें बिक्री, खरीद, स्टॉक और नकद लेन-देन से जुड़े सभी आंकड़ों का मिलान अनिवार्य रूप से किया जाएगा। साथ ही आबकारी विभाग के साथ समन्वय बनाकर रिकॉर्ड का सत्यापन और पुनः जांच की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी और प्रमाणित हो। इसके लिए आबकारी आयुक्त को स्वतंत्र रूप से बिक्री, स्टॉक और राजस्व डेटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी का पता लगाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने सख्त चेतावनी दी है कि जांच में यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय कुप्रबंधन पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं होगी।
साथ ही, सभी संबंधित विभागों को आदेश दिया गया है कि वे दो महीने के भीतर इस पूरी जांच की विस्तृत रिपोर्ट वित्त विभाग को सौंपें। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा, बल्कि राजस्व संग्रह प्रणाली भी अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।