डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 136वीं जयंती के अवसर पर दिल्ली विधानसभा परिसर में एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर विधानसभा के माननीय अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने बाबासाहेब के जीवन, विचारों और उनके अद्वितीय योगदान को याद करते हुए उन्हें समानता और सामाजिक न्याय का सबसे मजबूत स्तंभ बताया।
अपने संबोधन में विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर केवल एक महान नेता ही नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाने वाले दूरदर्शी विचारक थे। उन्होंने यह रेखांकित किया कि बाबासाहेब ने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित, शोषित और कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। उनका संघर्ष केवल सामाजिक सुधार तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने देश को एक ऐसा संवैधानिक ढांचा प्रदान किया, जो आज भी लोकतंत्र की नींव को मजबूती देता है।
डॉ. अम्बेडकर को भारतीय संविधान के शिल्पकार के रूप में याद करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि एक जीवंत और प्रगतिशील मार्गदर्शक है, जो देश को समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मार्ग पर आगे बढ़ाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बाबासाहेब की सोच और उनके सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे।
इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। विशेष रूप से महिला सफाई कर्मियों की उपस्थिति ने यह दर्शाया कि डॉ. अम्बेडकर के प्रति सम्मान और श्रद्धा केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के हर हिस्से में गहराई से व्याप्त है। यह दृश्य बाबासाहेब के उस सपने की झलक भी प्रस्तुत करता है, जिसमें उन्होंने एक समावेशी और बराबरी पर आधारित समाज की कल्पना की थी।
विजेन्द्र गुप्ता ने अपने भाषण में यह भी कहा कि आज के समय में जब समाज कई प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब डॉ. अम्बेडकर के विचार और अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि एक न्यायपूर्ण और समानतापूर्ण समाज के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि हम उनके आदर्शों को केवल शब्दों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और नीतियों में भी उतारें।
उन्होंने आगे कहा कि शासन और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता, समान अवसर और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों को प्राथमिकता देना ही बाबासाहेब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनके अनुसार, देश की प्रगति तभी संभव है जब समाज के हर वर्ग को समान अवसर और सम्मान मिले।
इस अवसर पर यह भी उल्लेख किया गया कि डॉ. अम्बेडकर की जयंती को उनके महान योगदान के सम्मान में राजपत्रित अवकाश घोषित किया गया है। यह निर्णय न केवल उनके कार्यों की सराहना है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनके विचारों और संघर्षों से प्रेरणा लेने का अवसर भी प्रदान करता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने बाबासाहेब के आदर्शों को अपनाने और उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस आयोजन ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं हैं, बल्कि वे आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
उनकी विचारधारा और सिद्धांत न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते हैं। बाबासाहेब का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा विकास तभी संभव है, जब समाज में हर व्यक्ति को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्राप्त हो।