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राशन वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव: अब परिवार नहीं, सदस्यों की संख्या तय करेगी अनाज की मात्रा

नई दिल्ली। देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और राशन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के लाभार्थियों को राशन वितरण का तरीका बदला जा सकता है। यदि यह प्रस्ताव […]

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  • June 24, 2026 11:00 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली। देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और राशन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के लाभार्थियों को राशन वितरण का तरीका बदला जा सकता है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो अब राशन की मात्रा पूरे परिवार के आधार पर नहीं बल्कि परिवार में शामिल सदस्यों की संख्या के अनुसार निर्धारित की जाएगी।

वर्तमान व्यवस्था के तहत अंत्योदय अन्न योजना से जुड़े प्रत्येक पात्र परिवार को हर महीने 35 किलोग्राम खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। यह व्यवस्था परिवार के आकार की परवाह किए बिना समान मात्रा में अनाज देने पर आधारित है। लेकिन सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था में कई व्यावहारिक समस्याएं हैं, क्योंकि छोटे और बड़े परिवारों को समान मात्रा में राशन मिलने से वितरण में असमानता पैदा होती है।

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार अब प्रति व्यक्ति के आधार पर राशन देने की व्यवस्था लागू की जा सकती है। मसौदे में प्रत्येक पात्र सदस्य को हर महीने 7 किलोग्राम खाद्यान्न उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है। इसका मतलब है कि जिस परिवार में जितने अधिक सदस्य होंगे, उसे उसी अनुपात में अधिक राशन मिलेगा। वहीं कम सदस्यों वाले परिवारों को आवश्यकता के अनुरूप ही खाद्यान्न प्राप्त होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक न्यायसंगत और पारदर्शी बना सकता है। वर्तमान व्यवस्था में पांच या छह सदस्यों वाले परिवार को भी 35 किलोग्राम अनाज मिलता है और दो या तीन सदस्यों वाले परिवार को भी उतनी ही मात्रा दी जाती है। नई व्यवस्था लागू होने पर लाभार्थियों को उनकी वास्तविक जरूरत के अनुसार खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सकेगा।

सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। देश में करोड़ों लोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सब्सिडी वाले खाद्यान्न का लाभ उठा रहे हैं। ऐसे में वितरण प्रणाली को अधिक सटीक और लाभार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा जारी मसौदे में सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। विभिन्न राज्यों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों से इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया मांगी जा रही है। सरकार का उद्देश्य सभी पक्षों की राय लेने के बाद अंतिम निर्णय करना है ताकि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।

हालांकि प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े परिवारों को इससे सीधा लाभ मिलेगा, जबकि छोटे परिवारों को पहले की तुलना में कम राशन मिल सकता है। दूसरी ओर कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि प्रति व्यक्ति आधारित वितरण प्रणाली अधिक व्यावहारिक और न्यायसंगत है, क्योंकि इससे प्रत्येक लाभार्थी को समान अधिकार मिलेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कई परिवारों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली आज भी खाद्य सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। महंगाई और आर्थिक चुनौतियों के बीच सस्ते दरों पर मिलने वाला राशन करोड़ों लोगों के लिए राहत का माध्यम बना हुआ है। ऐसे में राशन वितरण के नियमों में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे तौर पर बड़ी आबादी को प्रभावित करेगा।

यदि यह संशोधन लागू होता है, तो राज्यों को अपने राशन कार्ड रिकॉर्ड और लाभार्थियों के आंकड़ों को अद्यतन करना होगा। परिवारों में सदस्यों की संख्या का सही विवरण दर्ज करना भी आवश्यक होगा, ताकि वितरण प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो। इसके लिए डिजिटल रिकॉर्ड और आधार आधारित सत्यापन प्रणाली की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

फिलहाल यह प्रस्ताव मसौदा चरण में है और अंतिम निर्णय सरकार द्वारा सभी सुझावों एवं प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद लिया जाएगा। लेकिन इतना तय है कि यह बदलाव देश की राशन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो भविष्य में राशन वितरण की पूरी व्यवस्था अधिक व्यक्ति-केंद्रित और जरूरत आधारित बन सकती है, जिससे खाद्य सुरक्षा योजनाओं की प्रभावशीलता और पारदर्शिता दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है।

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