नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमानों को लेकर पाकिस्तान द्वारा किए गए दावों पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। हाल ही में सामने आए एक आधिकारिक रक्षा दस्तावेज़ ने संकेत दिया है कि भारतीय वायुसेना के सभी 36 राफेल विमान वर्तमान में परिचालन सेवा का हिस्सा हैं। इसके बाद उन दावों की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठने लगे हैं जिनमें कहा गया था कि सैन्य अभियान के दौरान भारत के कुछ राफेल विमान क्षतिग्रस्त हुए थे।
रक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि किसी भी वायुसेना द्वारा जारी रखरखाव और तकनीकी सहायता संबंधी दस्तावेज़ उसकी वास्तविक परिचालन क्षमता की झलक देते हैं। दस्तावेज़ में पूरे राफेल बेड़े के लिए सहायता और रखरखाव सेवाओं का उल्लेख होने से यह संकेत मिलता है कि सभी विमान सक्रिय स्थिति में हैं।
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से कई बार दावा किया गया था कि भारतीय वायुसेना को नुकसान पहुंचा है। हालांकि भारत ने इन आरोपों को शुरू से ही निराधार बताया था। अब नए दस्तावेज़ के सामने आने के बाद रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत के पक्ष को मजबूत करने वाला तथ्य मान रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि आधुनिक युद्ध केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सूचना और प्रचार के स्तर पर भी संघर्ष चलता है। ऐसे में विभिन्न पक्ष अपनी-अपनी रणनीति के तहत दावे और प्रतिदावे करते रहते हैं। इसलिए किसी भी दावे की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड और प्रमाणों के आधार पर ही की जानी चाहिए।
राफेल लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की सबसे आधुनिक सैन्य संपत्तियों में गिने जाते हैं। उन्नत रडार, लंबी दूरी की मारक क्षमता और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस ये विमान भारत की वायु शक्ति को महत्वपूर्ण मजबूती प्रदान करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, राफेल बेड़े की पूर्ण उपलब्धता भारतीय वायुसेना की परिचालन तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।