वाहन प्रदूषण पर सख्ती तेज, PAC रिपोर्ट पर 2027 तक एक्शन रिपोर्ट अनिवार्य

नई दिल्ली में बढ़ते वाहन जनित प्रदूषण को लेकर अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के आधार पर लोक लेखा समिति (PAC) की सिफारिशों को संबंधित विभागों तक भेजते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को साफ तौर पर […]

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bijendra-gupta
inkhbar News
  • April 20, 2026 6:18 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली में बढ़ते वाहन जनित प्रदूषण को लेकर अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के आधार पर लोक लेखा समिति (PAC) की सिफारिशों को संबंधित विभागों तक भेजते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को साफ तौर पर कहा गया है कि वे 31 दिसंबर 2026 तक सिफारिशों के क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट करें और 31 जनवरी 2027 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

इस संबंध में परिवहन मंत्री और परिवहन विभाग के आयुक्त को औपचारिक पत्र जारी कर दिया गया है, जिसमें समिति की सिफारिशों पर ठोस और समयबद्ध जवाब मांगा गया है। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि वाहन प्रदूषण से निपटने के लिए सिर्फ योजनाएं बनाना काफी नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना जरूरी है।

रिपोर्ट में दिल्ली में वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कई अहम पहलुओं की समीक्षा की गई है। इसमें नियामक ढांचे की कमजोरियां, प्रवर्तन में कमी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी जैसे मुद्दों को प्रमुख रूप से उजागर किया गया है। इन कमियों के चलते वायु गुणवत्ता सुधार की कोशिशें अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए बेहतर मॉनिटरिंग सिस्टम, पर्याप्त एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन और सटीक उत्सर्जन डेटा बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा व्यवस्थाओं में इन सभी क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है, ताकि नीतियां साक्ष्य आधारित बन सकें और उनका असर जमीन पर दिखाई दे।

सार्वजनिक परिवहन को लेकर भी चिंता जताई गई है। बसों की कमी, सीमित रूट कवरेज और कमजोर लास्ट माइल कनेक्टिविटी के कारण लोग निजी वाहनों पर अधिक निर्भर हो रहे हैं, जिससे प्रदूषण और बढ़ता है। इसके अलावा, वाहन उत्सर्जन जांच प्रणाली में खामियां, पीयूसी सर्टिफिकेट में अनियमितताएं और पुराने वाहनों की धीमी स्क्रैपिंग प्रक्रिया भी समस्या को गंभीर बना रही है।

हालांकि सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने जैसे कदम उठाए गए हैं, लेकिन इनके प्रभावी क्रियान्वयन में अभी भी सुधार की जरूरत है। विजेंद्र गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सभी विभागों को मिलकर एक समन्वित रणनीति के तहत काम करना होगा, तभी प्रदूषण पर काबू पाया जा सकेगा।

उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों से अपील की कि वे समिति की सिफारिशों पर तेजी से काम करें और तय समयसीमा के भीतर परिणाम प्रस्तुत करें, ताकि दिल्ली के लोगों को स्वच्छ और बेहतर वातावरण मिल सके।

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