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दिल्ली मुंडका में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान बड़ा हादसा, तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मुंडका क्षेत्र में शनिवार को सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया। जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पहले एक मजदूर टैंक में उतरते ही बेहोश हो गया। उसे बचाने के लिए दो अन्य […]

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  • June 27, 2026 2:00 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मुंडका क्षेत्र में शनिवार को सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया। जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पहले एक मजदूर टैंक में उतरते ही बेहोश हो गया। उसे बचाने के लिए दो अन्य साथी भी बिना सुरक्षा उपकरणों के टैंक में उतर गए, लेकिन वे भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए। तीनों को बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मृतकों की पहचान चांद, संदीप और अरुण के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस और संबंधित विभागों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

एक साथी को बचाने की कोशिश बनी जानलेवा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सेप्टिक टैंक की सफाई का काम चल रहा था। इसी दौरान सबसे पहले एक मजदूर टैंक के अंदर गया, जहां जहरीली गैस के प्रभाव से वह बेहोश होकर गिर पड़ा। उसे बाहर निकालने के लिए दूसरा मजदूर तुरंत टैंक में उतरा, लेकिन वह भी कुछ ही देर में अचेत हो गया। इसके बाद तीसरा मजदूर अपने दोनों साथियों को बचाने के उद्देश्य से नीचे गया, लेकिन वह भी जहरीली गैस का शिकार हो गया।

जब काफी देर तक कोई बाहर नहीं आया तो आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। बचाव दल ने तीनों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

घटना के तुरंत बाद तीनों मजदूरों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जहरीली गैस बनी मौत की वजह

विशेषज्ञों के अनुसार, सेप्टिक टैंक और सीवर के भीतर अक्सर हाइड्रोजन सल्फाइड, मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं। पर्याप्त ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैसों के कारण व्यक्ति कुछ ही सेकंड में बेहोश हो सकता है। यदि समय पर बचाव न मिले तो दम घुटने से मौत हो सकती है।

सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद एक बार फिर सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कार्यों में मजदूरों को बिना गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन सपोर्ट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपकरणों के नहीं उतारा जाना चाहिए। इसके अलावा आधुनिक मशीनों के जरिए सफाई को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।

पुलिस जांच में जुटी

मुंडका थाना पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सफाई का कार्य किसके निर्देश पर कराया जा रहा था और क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था। यदि लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मैनुअल सफाई पर रोक के बावजूद हादसे जारी

देश में सीवर और सेप्टिक टैंक की मैनुअल सफाई को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं। इसके बावजूद समय-समय पर इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन और आधुनिक मशीनों का उपयोग सुनिश्चित किए बिना ऐसे हादसों को रोकना मुश्किल होगा।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को रोजगार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन ने मामले की जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है।

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