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दिल्ली जलेबी हत्याकांड: 12 साल बाद दोषी को उम्रकैद की सजा

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में वर्ष 2014 में हुई चर्चित जलेबी विक्रेता हत्याकांड में अदालत ने 12 साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाते हुए कहा कि मामूली विवाद के कारण किसी की जान लेना समाज के लिए गंभीर अपराध है। यह मामला उस […]

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  • June 28, 2026 9:00 pm IST, Published 1 day ago

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में वर्ष 2014 में हुई चर्चित जलेबी विक्रेता हत्याकांड में अदालत ने 12 साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाते हुए कहा कि मामूली विवाद के कारण किसी की जान लेना समाज के लिए गंभीर अपराध है। यह मामला उस समय काफी चर्चा में आया था, जब बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास स्थित एक मिठाई की दुकान पर केवल जलेबी पहले देने से इनकार करने पर आरोपी ने दुकानदार की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

क्या था पूरा मामला?

यह घटना 18 फरवरी 2014 की है। दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारे के निकट स्थित एक प्रसिद्ध मिठाई की दुकान पर ग्राहकों की लंबी कतार लगी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आरोपी भी जलेबी खरीदने के लिए लाइन में खड़ा था। उसने दुकानदार से पहले जलेबी देने की मांग की, लेकिन दुकानदार ने सभी ग्राहकों को क्रम के अनुसार सामान देने की बात कही और लाइन तोड़ने से मना कर दिया।

दुकानदार के इस जवाब से आरोपी नाराज हो गया। पहले दोनों के बीच तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। इसके बाद आरोपी ने अपने पास मौजूद अवैध पिस्तौल निकाली और बेहद करीब से दुकानदार के सिर में गोली मार दी। गोली लगने के बाद दुकानदार मौके पर ही गिर पड़ा और अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया।

पुलिस जांच में सामने आए अहम तथ्य

घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाए और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों की गवाही के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त अवैध हथियार भी बरामद किया।

लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने कई अहम साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर आरोपी के खिलाफ हत्या और अवैध हथियार रखने के आरोप सिद्ध हुए।

अदालत ने सुनाया उम्रकैद का फैसला

मामले की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस लागू होने से पहले के प्रावधानों के अनुसार आईपीसी की धारा 302) के तहत हत्या का दोषी माना। साथ ही अवैध हथियार रखने और उसका इस्तेमाल करने के मामले में शस्त्र अधिनियम के तहत भी दोषी ठहराया गया।

सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में कड़ा संदेश देना आवश्यक है। अदालत ने यह भी माना कि मामूली विवाद में किसी की हत्या करना अत्यंत गंभीर अपराध है और समाज में इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

12 साल बाद मिला न्याय

यह मामला लगभग 12 वर्षों तक अदालत में विचाराधीन रहा। जांच, गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आखिरकार अदालत ने दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई। मृतक के परिजनों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे इंतजार के बाद उन्हें न्याय मिला है।

कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ती हिंसा और अवैध हथियारों के इस्तेमाल को लेकर चिंता पैदा करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी-छोटी बातों पर हिंसक घटनाएं समाज के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। ऐसे मामलों में त्वरित न्याय और अवैध हथियारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है।

समाज के लिए बड़ा संदेश

अदालत का यह फैसला स्पष्ट करता है कि कानून अपने हाथ में लेने वालों के लिए कोई राहत नहीं है। मामूली विवाद चाहे कितना भी छोटा क्यों न हो, यदि वह हिंसा और हत्या तक पहुंचता है तो दोषियों को कानून के अनुसार कठोर सजा भुगतनी पड़ती है। यह निर्णय समाज में कानून के प्रति विश्वास मजबूत करने और अपराधियों के लिए सख्त संदेश देने वाला माना जा रहा है।

इस मामले ने यह भी दिखाया कि सार्वजनिक स्थानों पर धैर्य और कानून का सम्मान कितना आवश्यक है। एक छोटी सी कहासुनी ने एक परिवार से उसका सदस्य छीन लिया और आरोपी का पूरा जीवन भी सलाखों के पीछे पहुंच गया। अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है कि न्याय मिलने में समय लग सकता है, लेकिन गंभीर अपराधों में दोषियों को अंततः सजा अवश्य मिलती है।

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