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अर्थव्यवस्था पर जयराम रमेश का मोदी सरकार पर हमला

नई दिल्ली: जयराम रमेश ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि देश में आर्थिक माहौल लगातार कमजोर होता जा रहा है और अब सरकार के समर्थक माने जाने वाले लोग भी सार्वजनिक रूप से चिंता जताने लगे हैं। उन्होंने कहा […]

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  • May 21, 2026 3:16 pm IST, Published 51 minutes ago

नई दिल्ली: जयराम रमेश ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि देश में आर्थिक माहौल लगातार कमजोर होता जा रहा है और अब सरकार के समर्थक माने जाने वाले लोग भी सार्वजनिक रूप से चिंता जताने लगे हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई के अनुमान बढ़ रहे हैं, जबकि विकास दर के अनुमान घटते जा रहे हैं। साथ ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में गिरावट और सप्लाई चेन प्रबंधन की कमजोरियों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

जयराम रमेश ने दावा किया कि निजी निवेश में तेजी नहीं आने के कारण आर्थिक विकास प्रभावित हो रहा है। उनके मुताबिक वास्तविक मजदूरी में ठहराव, उपभोक्ता मांग की कमी, नीतियों में बार-बार बदलाव, टैक्स नोटिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के डर से कारोबारी माहौल प्रभावित हुआ है। उन्होंने चीन से होने वाली डंपिंग और उद्योग जगत में बढ़ते केंद्रीकरण को भी चिंता का विषय बताया। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार के करीबी उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है, जिससे प्रतिस्पर्धा कमजोर हुई है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि देश को आर्थिक नीतियों में बड़े बदलाव की जरूरत है, लेकिन सरकार आत्मप्रशंसा में व्यस्त है। कॉरपोरेट इंडिया पर टैक्स दरें रिकॉर्ड निचले स्तर पर हैं और कंपनियों की कमाई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी है। शेयर बाजार के मूल्यांकन भी मजबूत बने हुए हैं। इसके बावजूद निवेश की रफ्तार सुस्त है। निवेश करने की क्षमता रखने वाले कई उद्योग समूह विदेशों में ज्यादा निवेश कर रहे हैं। बड़े-बड़े निवेश घोषणाएं लगातार हो रही हैं, लेकिन इनमें से कितनी योजनाएं जमीन पर वास्तविक परिसंपत्तियों में बदल रही हैं, यह गंभीर सवाल बना हुआ है।

जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री जनता से नैतिक अपील करने और प्रतीकात्मक संदेश देने में व्यस्त हैं, जबकि देश की आर्थिक स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने कहा कि देश को आर्थिक नीतियों में बड़े बदलाव की जरूरत है, लेकिन केंद्र सरकार के पास आत्मप्रशंसा के अलावा कोई नई सोच दिखाई नहीं देती।

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