नई दिल्ली/लातूर/पुणे: NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर से एक नामी डॉक्टर (बाल रोग विशेषज्ञ) डॉ. मनोज शिरुरे को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि डॉक्टर ने अपने बेटे के लिए मुख्य आरोपी और आरसीसी (RCC) कोचिंग क्लासेस के संचालक शिवराज मोटेगांवकर उर्फ ‘एम सर’ से लीक हुआ पेपर खरीदा था।
बुधवार को पुणे में लंबी पूछताछ के बाद डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया। इस पूरे मामले में किसी पेरेंट्स (अभिभावक) की यह पहली गिरफ्तारी है।
इस मामले में केंद्रीय एजेंसी अब तक 11 लोगों को दबोच चुकी है, जिसमें सबसे ज़्यादा गिरफ्तारियां महाराष्ट्र से हुई हैं:
महाराष्ट्र: 7 आरोपी (डॉक्टर मनोज शिरुरे और शिवराज मोटेगांवकर सहित)
राजस्थान: 3 आरोपी
हरियाणा: 1 आरोपी (गिरफ्तार आरोपियों में 2 महिलाएं भी शामिल हैं)
सीबीआई की जांच में मुख्य आरोपी शिवराज मोटेगांवकर को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। ‘एम सर’ के नाम से मशहूर शिवराज लातूर के खोपेगांव शिवार में 8 एकड़ जमीन पर एक आलीशान स्कूल और कॉलेज खोलने की तैयारी में था, जहां बहुमंजिला इमारत का निर्माण बेहद तेजी से चल रहा था।
सीबीआई अब उसके इस प्रोजेक्ट के फंडिंग सोर्स, जमीन की खरीद-फरोख्त और बैंक खातों में हुए आर्थिक लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है। इस सिलसिले में उसकी पत्नी और बेटे से भी पूछताछ की जा रही है। कार्रवाई के बाद पुणे नगर निगम ने आरोपी की RCC कोचिंग क्लासेस को पूरी तरह सील कर दिया है।
जांच एजेंसी के हाथ इस गिरोह के काम करने के तरीके (Modus Operandi) का पूरा कच्चा चिट्ठा लगा है:
कीमत की सेटिंग: गिरोह लीक हुए ‘गेस पेपर/क्वेश्चन बैंक’ को 5 लाख से लेकर 50 लाख रुपए तक में बेचता था। कीमत छात्र के परिवार की आर्थिक स्थिति देखकर तय होती थी।
टोकन मनी और गारंटी: डील फाइनल होते ही सिर्फ टोकन मनी ली जाती थी। गारंटी के तौर पर छात्र के असली डॉक्यूमेंट्स और परिजनों के ब्लैंक चेक रख लिए जाते थे।
आंसर-की आने पर पूरी पेमेंट: शर्त यह थी कि जब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ऑफिशियल आंसर-की आएगी और वह दिए गए सवालों से मैच कर जाएगी, तब बाकी की पूरी रकम चुकानी होगी।
ऐसे फूटा घड़ा: परीक्षा के बाद कई परिजनों ने गिरोह को पूरी रकम देने से मना कर दिया क्योंकि फिजिक्स के कुछ सवाल मैच नहीं खा रहे थे। इसी बीच 8 मई की रात को आईबी (Intelligence Bureau) से मिले इनपुट के बाद राजस्थान एसओजी (SOG) ने कार्रवाई शुरू की, जिसके बाद यह पूरा नेक्सस बेनकाब हो गया।