नई दिल्ली/जयपुर/पुणे: नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर मचे देशव्यापी बवाल के बीच गुरुवार को शिक्षा मामलों की संसद की स्थायी समिति की एक अहम बैठक हुई। इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के शीर्ष अधिकारियों को सांसदों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान एनटीए के महानिदेशक (DG) अभिषेक सिंह ने संसदीय समिति के सामने दावा किया कि नीट का पेपर उनके आंतरिक सिस्टम से लीक नहीं हुआ था। उन्होंने समिति को बताया कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। एनटीए अधिकारियों ने दलील दी कि पूरा पेपर लीक नहीं हुआ था, बल्कि कुछ चुनिंदा सवाल (Questions) ही बाहर आए थे।
एनटीए महानिदेशक के इस बयान पर समिति में मौजूद कई सांसदों ने उन्हें आड़े हाथों लिया। सांसदों ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा:
“अगर पेपर एनटीए के सिस्टम से लीक नहीं हुआ था, तो वह परीक्षा से पहले बाहर कैसे आया? और अगर सिस्टम में कोई गड़बड़ी नहीं थी, तो देश के 23 लाख छात्रों की परीक्षा को रद्द करके दोबारा परीक्षा (Re-Exam) कराने की नौबत क्यों आई?”
सूत्रों के अनुसार, सांसदों के इस सीधे और तार्किक सवाल पर एनटीए के डीजी कोई स्पष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। उन्होंने केवल इतना कहा कि मामला फिलहाल सीबीआई के पास है और जांच जारी है।
गौरतलब है कि इस साल 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेशों के 14 केंद्रों पर नीट-यूजी की परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 23 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। एनटीए के मुताबिक, 7 मई की शाम को परीक्षा में गड़बड़ी और ‘गेस पेपर’ के नाम पर सोशल मीडिया पर सवाल मैच होने की शुरुआती सूचना मिली थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 12 मई को इस परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर दिया गया था। अब सरकार और एनटीए के फैसले के मुताबिक, 21 जून को दोबारा नीट परीक्षा (Re-NEET) का आयोजन किया जाएगा।