पश्चिम बंगाल: 4 मई को आने वाले चुनावी नतीजों से पहले राजनीतिक माहौल बेहद गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक साथ कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच खुदीराम अनुशीलन केंद्र के बाहर टीएमसी नेताओं और समर्थकों ने धरना देकर माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया।
सबसे पहला झटका एग्जिट पोल के नतीजों से जुड़ा है, जिनमें कई सर्वे एजेंसियों ने भारतीय जनता पार्टी को बढ़त का अनुमान जताया है। रिपोर्ट्स में बीजेपी को 140 से 170 सीटें मिलने की संभावना बताई गई है, जबकि टीएमसी की सीटों में गिरावट का अनुमान सामने आया है। हालांकि कुछ सर्वे में टीएमसी की वापसी की संभावना भी जताई गई है। ममता बनर्जी ने इन एग्जिट पोल को खारिज करते हुए इसे “मनगढ़ंत और राजनीतिक साजिश” बताया और कहा कि इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने की कोशिश की जा रही है।
दूसरा झटका कानूनी मोर्चे पर लगा, जब कोलकाता हाईकोर्ट ने टीएमसी की दो अहम याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं में मतगणना के दौरान केंद्रीय बलों की तैनाती और काउंटिंग सेंटर बदलने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पूरी तरह वैध है और हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
तीसरा बड़ा विवाद स्ट्रांग रूम को लेकर सामने आया, जहां भवानीपुर क्षेत्र में भारी हंगामा देखने को मिला। ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं और देर रात तक स्थिति पर नजर रखी। टीएमसी ने आरोप लगाया कि सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां दिखीं और बिना सूचना स्ट्रांग रूम खोला गया। इसके बाद धरना प्रदर्शन भी हुआ।
वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए टीएमसी पर राजनीतिक माहौल खराब करने का आरोप लगाया। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि ईवीएम और स्ट्रांग रूम पूरी तरह सुरक्षित हैं और वायरल वीडियो पोस्टल बैलेट की नियमित प्रक्रिया से जुड़े हैं। अब पूरे राज्य की नजर 4 मई के नतीजों पर टिकी है, जहां से बंगाल की राजनीतिक दिशा तय होने की उम्मीद है।