मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz एक बार फिर चर्चा में आ गया है। ईरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस अहम समुद्री रास्ते को दोबारा बंद करने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले के बाद वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है और इसके असर को लेकर भारत समेत कई देशों में चिंता बढ़ गई है। शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर सहमति बनी थी। इस खबर से दुनियाभर के शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई थी। लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। शनिवार दोपहर ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने घोषणा की कि होर्मुज का नियंत्रण फिर से पहले जैसी स्थिति में आ गया है और इसे बंद किया जा रहा है। इस चेतावनी के बाद कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों ने अपने रास्ते बदल लिए या वापस लौटना शुरू कर दिया।
दुनिया के 20% तेल की लाइफलाइन है होर्मुज
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक स्तर पर करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला अधिकतर तेल इसी रास्ते से एशिया, यूरोप और अमेरिका तक पहुंचता है। ऐसे में अगर यह मार्ग बंद होता है, तो सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ता है और तेल की कीमतों में तेजी आना लगभग तय माना जाता है।

तेल की कीमतों में उछाल का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल आ सकता है। पहले भी जब इस मार्ग पर संकट आया था, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम तेजी से बढ़े थे। हालांकि उस समय भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सीमित असर देखा गया था, लेकिन लंबे समय तक संकट बने रहने पर इसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है।
तेल की कीमतों में उछाल का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल आ सकता है। पहले भी जब इस मार्ग पर संकट आया था, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम तेजी से बढ़े थे। हालांकि उस समय भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सीमित असर देखा गया था, लेकिन लंबे समय तक संकट बने रहने पर इसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें खाड़ी देशों की बड़ी भूमिका है। ऐसे में अगर सप्लाई बाधित होती है या तेल महंगा होता है, तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।