दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल जमीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समुद्रों के भीतर भी तेजी से बदलती परिस्थितियाँ गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। हाल ही में सामने आए एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि समुद्री गर्मी की लहरें (Ocean Heat Waves) उष्णकटिबंधीय तूफानों और चक्रवातों की तीव्रता को और अधिक खतरनाक बना रही हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, अब समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ रहा है, और यह बढ़ी हुई गर्मी तूफानों के लिए “ईंधन” का काम कर रही है। जिस तरह धरती पर हीट वेव्स गर्मी का अत्यधिक दबाव पैदा करती हैं, उसी तरह समुद्र के भीतर भी लंबे समय तक चलने वाली गर्मी की लहरें बन रही हैं, जो मौसम प्रणालियों को प्रभावित कर रही हैं।
अध्ययन में 1981 के बाद से लगभग 1,600 उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) का विश्लेषण किया गया। इसमें यह पाया गया कि जो तूफान अत्यधिक गर्म समुद्री क्षेत्रों से होकर गुजरे, उनकी तीव्रता तेजी से बढ़ी और वे कुछ ही समय में अत्यंत विनाशकारी रूप ले बैठे।
विशेष रूप से 2023 में आए विनाशकारी तूफान Hurricane Otis का उदाहरण वैज्ञानिकों ने प्रमुख रूप से दिया है। यह तूफान बहुत तेजी से विकसित हुआ और कुछ ही समय में एक सामान्य उष्णकटिबंधीय तूफान से कैटेगरी-5 हरिकेन में बदल गया। इसके बाद यह मेक्सिको के अकापुल्को के पास भारी तबाही मचाते हुए तट से टकराया, जहां हवाओं की गति लगभग 265 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी। इस घटना ने यह साबित किया कि गर्म समुद्री सतह तूफानों को अप्रत्याशित रूप से शक्तिशाली बना सकती है।
रिसर्च में “Marine Heat Waves” को ऐसे क्षेत्रों के रूप में परिभाषित किया गया है, जहां समुद्री पानी का तापमान लंबे समय तक ऐतिहासिक औसत के शीर्ष 10 प्रतिशत स्तर तक पहुंच जाता है। यह स्थिति समुद्र में असामान्य ऊर्जा जमा कर देती है, जो तूफानों के निर्माण और उनके तेज होने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र लगातार गर्म हो रहे हैं। इसका सीधा असर यह हो रहा है कि तूफानों की संख्या ही नहीं, बल्कि उनकी तीव्रता भी बढ़ रही है। गर्म पानी तूफानों को ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे वे अधिक तेजी से विकसित होते हैं और अधिक दूरी तक विनाश फैला सकते हैं।
नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के वैज्ञानिक और अध्ययन के सह-लेखक ग्रेगरी फोल्त्ज़ ने बताया कि समुद्री गर्मी की लहरें अब उन चक्रवातों को भी प्रभावित कर रही हैं जो सीधे जमीन की ओर बढ़ते हैं। उनका कहना है कि जब तूफान ऐसे गर्म समुद्री क्षेत्रों से गुजरते हैं, तो उनके तेजी से शक्तिशाली होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यह प्रवृत्ति अब और अधिक सामान्य होती जा रही है, यानी ऐसे खतरनाक तूफान अब पहले की तुलना में अधिक बार बन सकते हैं और अधिक आबादी वाले क्षेत्रों के करीब पहुंच सकते हैं। इसका परिणाम यह है कि तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा लगातार बढ़ रहा है।
अलबामा यूनिवर्सिटी के कोस्टल इंजीनियरिंग विशेषज्ञ और सह-लेखक हामेद मोफ्ताखारी ने कहा कि हाल के वर्षों में अमेरिका और अन्य देशों में आए तूफानों ने यह साफ दिखाया है कि समुद्री तापमान में बदलाव सीधे तौर पर प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता को प्रभावित कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तापमान वृद्धि पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में ऐसे शक्तिशाली तूफानों की संख्या और बढ़ सकती है। इससे न केवल पर्यावरणीय नुकसान होगा, बल्कि आर्थिक और मानवीय क्षति भी गंभीर रूप ले सकती है।
समुद्री वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि अब मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों में समुद्री गर्मी की लहरों को एक महत्वपूर्ण फैक्टर के रूप में शामिल करना जरूरी हो गया है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन सा तूफान कब और कितनी तेजी से खतरनाक रूप ले सकता है।
कुल मिलाकर यह अध्ययन एक गंभीर चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब समुद्र की गहराइयों तक पहुंच चुका है, और इसका प्रभाव दुनिया भर के मौसम और जीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।