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आयुष्मान योजना में बड़ा खेल! एक परिवार से लाखों का क्लेम, जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) ने जांच तेज कर दी है। प्रारंभिक जांच में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां एक ही परिवार के सदस्यों […]

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  • July 17, 2026 10:30 pm IST, Published 2 hours ago

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) ने जांच तेज कर दी है। प्रारंभिक जांच में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां एक ही परिवार के सदस्यों के नाम पर बार-बार अस्पताल में भर्ती दिखाकर लाखों रुपये का क्लेम लिया गया। कुछ मामलों में जरूरत न होने के बावजूद मरीजों को आईसीयू में भर्ती दिखाया गया, जबकि कई अस्पतालों में उपचार संबंधी मानकों का पालन नहीं मिलने की बात भी सामने आई है।

सूत्रों के अनुसार, राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा विभिन्न जिलों में किए गए औचक निरीक्षण के दौरान कई निजी और सूचीबद्ध अस्पतालों में संदिग्ध दावे (Claims) पाए गए। निरीक्षण टीम ने मरीजों के रिकॉर्ड, भर्ती रजिस्टर, उपचार संबंधी दस्तावेज और क्लेम फाइलों की जांच की। जांच के दौरान कई ऐसे मामलों की पहचान हुई, जिनमें एक ही परिवार के सदस्यों को अलग-अलग समय पर बार-बार भर्ती दिखाकर योजना के तहत बड़ी राशि का भुगतान लिया गया।

अधिकारियों के अनुसार, कुछ अस्पतालों में मरीजों को वास्तविक आवश्यकता के बिना आईसीयू में भर्ती दिखाने, इलाज की अवधि बढ़ाकर दर्शाने तथा महंगे पैकेजों का दावा करने जैसी अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसके अलावा कई मामलों में स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन (STG) का पालन नहीं किया गया। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका और गहरा गई है।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। योजना में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या वित्तीय अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी उद्देश्य से समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण और क्लेम ऑडिट कराया जाता है।

अधिकारियों का कहना है कि निरीक्षण में मिले तथ्यों के आधार पर संबंधित अस्पतालों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जहां भी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होगी, वहां अस्पतालों पर आर्थिक दंड लगाने, क्लेम की राशि वसूलने, अस्पताल को योजना से निलंबित करने अथवा सूची से हटाने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। यदि जांच में फर्जीवाड़ा या धोखाधड़ी के पुख्ता प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी संभव है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी योजना की सफलता पूरी तरह पारदर्शिता और ईमानदारी पर निर्भर करती है। यदि कुछ अस्पताल गलत तरीके से क्लेम लेकर सरकारी धन का दुरुपयोग करते हैं तो इसका सीधा असर उन गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ता है, जिन्हें वास्तव में इस योजना का लाभ मिलना चाहिए।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने सभी जिलों में निगरानी व्यवस्था और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। संदिग्ध क्लेम की पहचान के लिए डिजिटल डेटा एनालिटिक्स, मेडिकल ऑडिट और फील्ड वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को भी तेज किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी और सख्त की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी अस्पताल द्वारा आयुष्मान योजना के नाम पर अनावश्यक भर्ती, अतिरिक्त धन की मांग या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता की जाती है तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें। शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार द्वारा लगातार निगरानी और नियमित ऑडिट किए जाने से ऐसे मामलों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। साथ ही अस्पतालों को भी निर्धारित उपचार प्रोटोकॉल और योजना के नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा, ताकि योजना का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक बिना किसी बाधा के पहुंच सके।

फिलहाल जांच जारी है और संबंधित मामलों की विस्तृत समीक्षा की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी अस्पताल या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर अंतिम कार्रवाई की जाएगी।

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