नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोने की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। बीते कुछ दिनों में सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब ₹36,000 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद कीमतों में गिरावट का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा। सोमवार को भी घरेलू सर्राफा बाजार और अंतरराष्ट्रीय बाजार दोनों में सोने के दाम दबाव में रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती, निवेशकों की बदलती रणनीति, वैश्विक बाजारों में मुनाफावसूली और ब्याज दरों को लेकर बनी उम्मीदों के कारण सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने वैश्विक बाजार में नई चिंता पैदा कर दी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर हुआ सोना
सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में करीब 4 डॉलर प्रति औंस की गिरावट दर्ज की गई। इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। विदेशी निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश के बजाय अन्य परिसंपत्तियों की ओर रुख करने से सोने की मांग में नरमी आई, जिसके कारण कीमतों में गिरावट जारी रही।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यदि आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाया जाता है, तो सोने की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
घरेलू बाजार में भी नरमी
भारतीय सर्राफा बाजार में भी सोमवार को सोना सस्ता हुआ। विभिन्न कैरेट के सोने के ताजा भाव इस प्रकार रहे—
24 कैरेट सोना: ₹1,40,590 प्रति 10 ग्राम
22 कैरेट सोना: ₹1,29,300 प्रति 10 ग्राम
18 कैरेट सोना: ₹1,05,870 प्रति 10 ग्राम
14 कैरेट सोना: ₹82,580 प्रति 10 ग्राम
पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में सभी श्रेणियों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि विभिन्न शहरों में टैक्स, मेकिंग चार्ज और स्थानीय शुल्क के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है।
आखिर क्यों गिर रहे हैं सोने के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण हैं—
अमेरिकी डॉलर की मजबूती।
वैश्विक बाजारों में मुनाफावसूली।
ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की नई रणनीति।
इक्विटी बाजारों में निवेशकों की बढ़ती रुचि।
अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतकों का असर।
इन सभी कारणों से सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग फिलहाल कमजोर हुई है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर
एक ओर सोने की कीमतें गिर रही हैं तो दूसरी ओर कच्चे तेल के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। आमतौर पर महंगाई बढ़ने पर सोना मजबूत होता है, लेकिन इस समय डॉलर की मजबूती और अन्य आर्थिक कारकों के कारण सोना दबाव में बना हुआ है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार जानकारों का कहना है कि सोने में निवेश करने वालों को जल्दबाजी से बचना चाहिए। यदि कोई लंबी अवधि का निवेशक है तो चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं अल्पकालिक निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर इंडेक्स और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव आता है तो सोने की कीमतों में फिर से तेजी लौट सकती है। इसलिए निवेश से पहले बाजार की चाल और विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी है।
क्या आगे और सस्ता होगा सोना?
विश्लेषकों के मुताबिक आने वाले दिनों में सोने की कीमतों की दिशा काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों, डॉलर की चाल, वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यदि डॉलर मजबूत बना रहता है तो सोने में और गिरावट संभव है। वहीं वैश्विक तनाव बढ़ने या ब्याज दरों में कटौती के संकेत मिलने पर सोना दोबारा मजबूती पकड़ सकता है।
खरीदारों के लिए सुनहरा मौका?
शादी-विवाह का सीजन और त्योहारों की तैयारी कर रहे लोगों के लिए मौजूदा गिरावट राहत भरी खबर मानी जा रही है। यदि कीमतों में और नरमी आती है तो सोने की खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं को अतिरिक्त फायदा मिल सकता है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खरीदारी से पहले अपने शहर के ताजा भाव अवश्य जांच लें।