मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में सत्यापन के दौरान बड़ा खुलासा सामने आया है। अप्रैल से 30 जुलाई तक आए 1201 आवेदनों में से महज 201 आवेदन ही पात्र पाए गए हैं। करीब 1000 महिलाओं के आवेदन सत्यापन में नियमों के अनुरूप नहीं मिले, जिसके बाद उन्हें योजना के लाभ से बाहर कर दिया गया। अब प्रशासन ने पात्र युवतियों की संख्या बढ़ाने और निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के लिए पंचायत स्तर पर आवेदन प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं।
1522 शादियों का रखा गया है लक्ष्य
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत इस बार कुल 1522 जोड़ों की शादी कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए अप्रैल से आवेदन मांगे गए थे। 30 जुलाई तक विभाग को कुल 1201 आवेदन प्राप्त हुए। इन आवेदनों का ब्लॉक स्तर पर सत्यापन कराया गया।
सत्यापन के दौरान सामने आया कि आवेदन करने वाली बड़ी संख्या में महिलाएं योजना की निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करती थीं। जांच पूरी होने के बाद करीब 1000 आवेदन अपात्र पाए गए, जबकि केवल 201 आवेदक ही योजना के तहत शादी के लिए पात्र मिले।
प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती निर्धारित 1522 शादियों के लक्ष्य को पूरा करने की है। इसके लिए जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और पंचायत स्तर के कर्मचारियों को पात्र युवतियों के अधिक से अधिक आवेदन कराने के निर्देश दिए हैं।
शादी के बाद भी योजना का लाभ लेने की कोशिश
सत्यापन के दौरान कई ऐसे मामले भी सामने आए, जिनमें आवेदकों की शादी पहले ही हो चुकी थी। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी में सहायता उपलब्ध कराना है। इसके तहत निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया जाता है।
जांच में यह बात सामने आई कि कुछ महिलाओं ने पहले ही विवाह कर लिया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत लाभ लेने के लिए आवेदन किया। कुछ मामलों में शादी को कई महीने बीत चुके थे। ऐसे आवेदनों को सत्यापन के बाद निरस्त कर दिया गया।
प्रशासन का कहना है कि योजना का लाभ केवल उन्हीं पात्र लाभार्थियों को दिया जाएगा, जो निर्धारित नियमों और शर्तों को पूरा करते हों। इसी उद्देश्य से आवेदन के बाद ब्लॉक स्तर पर दस्तावेजों और अन्य जरूरी जानकारियों का सत्यापन कराया जा रहा है।
गरीबी के कारण भी सामने आए ऐसे मामले
जांच में यह भी सामने आया कि आर्थिक तंगी के कारण कुछ महिलाओं ने योजना के तहत मिलने वाली सहायता के लिए आवेदन किया था। अछनेरा ब्लॉक क्षेत्र की एक महिला ने बताया कि शादी की तारीख पहले ही तय हो गई थी, लेकिन निर्धारित समय पर सामूहिक विवाह का आयोजन नहीं हो सका।
इसके बाद पिछले साल योजना का लाभ नहीं मिल सका। महिला के अनुसार, आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसने इस बार योजना के अंतर्गत आवेदन कर दिया। हालांकि सत्यापन में यह स्पष्ट हो गया कि उसका विवाह पहले ही हो चुका है। नियमों के अनुसार ऐसे आवेदन को पात्र नहीं माना गया।
यह मामला इस बात को भी सामने लाता है कि कई जरूरतमंद परिवार योजना की सहायता पाने की उम्मीद में आवेदन कर रहे हैं, लेकिन योजना के नियमों के कारण हर आवेदक को लाभ नहीं मिल सकता।
अगस्त में हो सकती हैं सामूहिक शादियां
पात्र आवेदनों की संख्या कम होने के बाद अब प्रशासन ने नए पात्र आवेदकों की तलाश तेज कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, पात्र युवतियों के अधिक से अधिक आवेदन कराने के लिए पंचायत सचिव, ग्राम विकास अधिकारी और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
योजना के तहत पात्र आवेदकों की जांच और दस्तावेज सत्यापन के बाद सामूहिक विवाह कराया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शादियां अगस्त में कराए जाने की तैयारी है।
प्रशासन का प्रयास है कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप अधिक से अधिक पात्र जोड़ों को योजना से जोड़ा जाए। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र परिवारों तक योजना की जानकारी पहुंचाने और आवेदन कराने पर जोर दिया जा रहा है।
नगर क्षेत्र से भी आए 150 आवेदन
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ नगर क्षेत्र से भी आवेदन प्राप्त हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नगर क्षेत्र में करीब 150 आवेदन आए हैं। इन आवेदनों का भी सत्यापन कराया जाएगा।
सत्यापन में पात्र पाए जाने वाले आवेदकों को योजना के तहत सामूहिक विवाह में शामिल किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल आवेदन कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि योजना की पात्रता शर्तों को पूरा करना और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है।
लक्ष्य पूरा करना प्रशासन के लिए चुनौती
1522 शादियों का लक्ष्य और अब तक केवल 201 पात्र आवेदन सामने आने के बाद प्रशासन के सामने बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। हालांकि आवेदन प्रक्रिया अभी जारी है और नए आवेदन लिए जा रहे हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि आगे पात्र लाभार्थियों की संख्या बढ़ेगी।
पंचायत स्तर पर अधिकारियों को निर्देश दिए जाने का मकसद भी यही है कि योजना से वास्तव में जरूरतमंद और पात्र परिवार जुड़ सकें। साथ ही पहले से विवाहित महिलाओं या नियमों के अनुरूप पात्रता पूरी नहीं करने वाले आवेदनों को समय रहते अलग किया जा सके।
पात्रता जांच पर बढ़ा जोर
इस पूरे मामले ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में आवेदन के बाद होने वाले सत्यापन की अहमियत को भी सामने ला दिया है। योजना का लाभ वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंचे, इसके लिए दस्तावेजों की जांच और विवाह की स्थिति का सत्यापन महत्वपूर्ण है।
अभी तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक 1201 आवेदनों में केवल 201 आवेदक पात्र पाए गए हैं। करीब 1000 आवेदन निरस्त होने के बाद अब प्रशासन नए पात्र आवेदनों पर फोकस कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए आवेदनों के जरिए 1522 शादियों के निर्धारित लक्ष्य के कितने करीब पहुंचा जा सकता है।