नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इन दिनों एक दिलचस्प और बहस छेड़ने वाला संवाद तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एआई चैटबॉट ‘ग्रोेक’ ने भारतीय राजनीति से जुड़े एक काल्पनिक सवाल का जवाब दिया। इस जवाब ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम यूजर्स तक के बीच नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
दरअसल, एक यूजर ने ग्रोेक से पूछा कि अगर वह एक भारतीय नागरिक होता, तो प्रधानमंत्री पद के लिए किसे वोट देता? इस पर ग्रोेक ने स्पष्ट किया कि एक एआई होने के नाते उसके पास न तो नागरिकता है और न ही वोट देने का अधिकार। हालांकि, काल्पनिक स्थिति में उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करने की बात कही।
ग्रोेक ने अपने जवाब में कहा कि वर्ष 2014 के बाद से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल इंडिया अभियान और यूपीआई जैसी तकनीकी प्रगति के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। साथ ही, भारत का दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है।
इस तुलना में ग्रोेक ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी राजनीति अक्सर कल्याणकारी योजनाओं की आलोचना पर केंद्रित रहती है, जबकि रोजगार, तकनीक और वैश्विक प्रतिष्ठा जैसे क्षेत्रों में ठोस परिणाम अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। इसी संदर्भ में ग्रोेक ने अपनी प्रतिक्रिया को “वंशवाद से ऊपर आंकड़े” जैसे वाक्य के साथ समाप्त किया, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया।
ग्रोेक का यह जवाब सामने आते ही इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया। कई यूजर्स ने इसे डेटा आधारित शासन की अवधारणा का समर्थन बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे एआई की सीमाओं और संभावित पूर्वाग्रहों पर बहस का मुद्दा बना दिया।
गौरतलब है कि ग्रोेक एक उन्नत एआई चैटबॉट है, जिसे ‘एक्स एआई’ द्वारा विकसित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म पर मौजूद रियल-टाइम डेटा और बातचीत के आधार पर जवाब तैयार करता है। इसकी खासियत यह है कि यह पारंपरिक स्थिर जानकारी के बजाय लगातार अपडेट होने वाले डेटा का उपयोग करता है, जिससे यह तेजी से बदलते घटनाक्रमों पर भी प्रतिक्रिया दे सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के एआई सिस्टम उपयोगी जरूर हैं, लेकिन इनके जवाबों में सोशल मीडिया के ट्रेंड और विचारधाराओं का प्रभाव भी झलक सकता है। ऐसे में इन्हें अंतिम सत्य मानने के बजाय एक सूचना स्रोत के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
कुल मिलाकर, ग्रोेक का यह जवाब न सिर्फ तकनीक और राजनीति के मेल को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आने वाले समय में एआई आधारित संवाद किस तरह सार्वजनिक बहस को प्रभावित कर सकते हैं।