• होम
  • दिल्ली/NCR
  • संजय सान्याल ने कोचिंग और NEET पर उठाए बड़े सवाल, मचा हड़कंप

संजय सान्याल ने कोचिंग और NEET पर उठाए बड़े सवाल, मचा हड़कंप

नई दिल्ली। देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और बढ़ते कोचिंग कल्चर को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद से जुड़े अर्थशास्त्री संजीव सान्याल के हवाले से शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर कई अहम टिप्पणियां सामने आई हैं। […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • August 20, 2026 8:30 pm IST, Published 44 minutes ago

नई दिल्ली। देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और बढ़ते कोचिंग कल्चर को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद से जुड़े अर्थशास्त्री संजीव सान्याल के हवाले से शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर कई अहम टिप्पणियां सामने आई हैं। पोस्ट के अनुसार, सान्याल ने कोचिंग व्यवस्था, सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और NEET जैसी परीक्षाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया है।

हालांकि, वायरल पोस्ट में दिए गए बयानों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। ऐसे में इन टिप्पणियों को सान्याल के कथित विचारों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों पर छात्रों और अभिभावकों की निर्भरता लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।

चीन के उदाहरण से समझाया कोचिंग व्यवस्था का असर

वायरल पोस्ट के मुताबिक, संजीव सान्याल ने कोचिंग संस्कृति पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई। उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी एक समय पर इसी तरह की गड़बड़ियों और कोचिंग संस्कृति का विस्तार हुआ था। इसके बाद वहां कोचिंग व्यवस्था में सुधार के लिए सख्त कदम उठाए गए और सार्वजनिक स्कूलों की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

सान्याल के कथित बयान के अनुसार, भारत में भी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केवल कोचिंग संस्थानों की संख्या बढ़ाना समाधान नहीं है। इसके बजाय सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, शिक्षकों की क्षमता और विद्यार्थियों को मिलने वाली शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करना जरूरी है।

यह बहस इसलिए अहम है क्योंकि बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निजी कोचिंग संस्थानों का नेटवर्क तेजी से बढ़ा है। IIT-JEE, NEET और अन्य परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्कूल के साथ-साथ कोचिंग पर निर्भर रहते हैं।

सरकारी स्कूल मजबूत होंगे तो घटेगा कोचिंग का दबाव

वायरल सामग्री में सान्याल के हवाले से कहा गया है कि भारत में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ कोचिंग क्षेत्र की भूमिका और उसके प्रभाव की समीक्षा भी जरूरी है।

विशेषज्ञों के बीच लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि यदि स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर हो, विद्यार्थियों को पर्याप्त मार्गदर्शन मिले और परीक्षा प्रणाली अवधारणात्मक समझ को महत्व दे, तो निजी कोचिंग पर निर्भरता कम हो सकती है।

कोचिंग व्यवस्था का दूसरा पहलू आर्थिक दबाव भी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कई परिवार बड़ी रकम खर्च करते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिए यह खर्च अतिरिक्त चुनौती बन जाता है। ऐसे में सरकारी शिक्षा संस्थानों की मजबूती को समान अवसर उपलब्ध कराने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जाता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर भी उठाया सवाल

वायरल पोस्ट के अनुसार, सान्याल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें कई अच्छे प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन बदलती तकनीकी परिस्थितियों के अनुरूप इसे लगातार अपडेट करने की जरूरत है।

यह मुद्दा खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI शिक्षा और रोजगार दोनों के क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रहा है। आज विद्यार्थियों को केवल परीक्षा पास करने के लिए तैयार करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उन्हें बदलती तकनीक, डिजिटल कौशल, समस्या समाधान, रचनात्मक सोच और व्यावहारिक ज्ञान से भी जोड़ना जरूरी है।

वायरल पोस्ट में सान्याल के हवाले से कहा गया है कि जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार की गई थी, उस समय AI का प्रभाव आज की तरह व्यापक नहीं था। इसलिए आने वाले समय में शिक्षा नीति को नई तकनीकी वास्तविकताओं के अनुरूप ढालना महत्वपूर्ण होगा।

NEET को खत्म करने के बजाय परीक्षा सुधारने की बात

सान्याल के कथित बयान का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला हिस्सा NEET को लेकर है। पोस्ट के अनुसार, उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी NEET का बचाव करते हुए कहा कि इस परीक्षा से पहले मेडिकल दाखिलों के लिए कई अलग-अलग परीक्षाएं और कैपिटेशन फीस जैसी व्यवस्थाएं थीं, जिनमें अनियमितताओं की गुंजाइश रहती थी।

उनके मुताबिक, NEET को पूरी तरह खत्म करने के बजाय परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

NEET को लेकर यह चर्चा ऐसे समय में सामने आई है जब 2026 की परीक्षा से जुड़ा पेपर लीक मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच में NEET-UG 2026 के प्रश्नपत्र से जुड़े कथित लीक मामले में कई गिरफ्तारियां हुई हैं। मई में गृह मंत्रालय ने बताया था कि जांच में विशेष कोचिंग सत्रों के जरिए प्रश्नों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने का मामला सामने आया।

बाद में CBI की चार्जशीट से जुड़े विवरणों में भी प्रश्नपत्र की तैयारी और कथित लीक नेटवर्क को लेकर कई गंभीर जानकारियां सामने आईं।

पेपर लीक पर पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग

वायरल पोस्ट में सान्याल के कथित विचारों के अनुसार, पेपर लीक जैसी घटनाओं को गंभीर समस्या मानते हुए परीक्षा प्रणाली में प्रश्नपत्र की सुरक्षा, निष्पक्ष परीक्षा संचालन और विद्यार्थियों के वास्तविक प्रदर्शन के आधार पर परिणाम सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

NEET जैसी परीक्षा में देशभर से विद्यार्थी शामिल होते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र की गोपनीयता और परीक्षा की निष्पक्षता का महत्व और बढ़ जाता है। किसी भी प्रकार की अनियमितता का असर केवल परीक्षा परिणाम पर नहीं बल्कि विद्यार्थियों के कई वर्षों के भविष्य पर पड़ सकता है।

इसी वजह से परीक्षा व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल के साथ-साथ मानवीय स्तर पर भी मजबूत निगरानी, सुरक्षित प्रश्नपत्र प्रबंधन और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती

कोचिंग संस्कृति, सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता तीनों मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यदि स्कूल स्तर पर मजबूत शिक्षा उपलब्ध होती है, तो विद्यार्थियों पर अतिरिक्त कोचिंग का दबाव कम हो सकता है। वहीं, यदि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित रहती है, तो छात्रों का भरोसा भी मजबूत होगा।

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की जांच ने भी परीक्षा सुरक्षा और प्रश्नपत्र प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

ऐसे में संजीव सान्याल के नाम से वायरल हो रहे कथित बयान ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बहस को एक नया आधार दे दिया है। सवाल अब केवल NEET को रखने या हटाने का नहीं है, बल्कि यह है कि देश ऐसी परीक्षा व्यवस्था कैसे तैयार करे जिसमें मेहनत करने वाले विद्यार्थियों को निष्पक्ष अवसर मिले।

आने वाले वर्षों में AI और नई तकनीकों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए शिक्षा व्यवस्था को भी बदलना होगा। स्कूलों को मजबूत करना, कोचिंग पर अत्यधिक निर्भरता कम करना, परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाना और विद्यार्थियों की वास्तविक योग्यता का मूल्यांकन करना भारतीय शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी प्राथमिकताएं बन सकती हैं।

Advertisement