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10 मीटर एयर पिस्टल में मनु भाकर का पदक जीतने का सपना टूटा

भारत ने पिछले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत की है। युवा और अनुभवी निशानेबाजों से भारतीय दल को कई पदकों की उम्मीद रहती है। मनु जैसी अनुभवी खिलाड़ी की मौजूदगी टीम के लिए अतिरिक्त मजबूती मानी जाती है। ऐसे में उनके पदक से

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Gauravshali Bharat News
  • September 23, 2026 10:33 am IST, Published 2 hours ago

एशियाई खेलों में भारत की स्टार निशानेबाज और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में पदक हासिल करने से चूक गईं। उनसे इस स्पर्धा में भारत के लिए पदक की उम्मीदें जुड़ी थीं, लेकिन फाइनल में वह अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकीं और पदक की दौड़ से बाहर हो गईं। मनु के नतीजे के साथ ही इस स्पर्धा में भारत की पदक उम्मीदों को झटका लगा।

मनु भाकर भारतीय निशानेबाजी की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े मुकाबलों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीतकर उन्होंने भारतीय खेल इतिहास में खास जगह बनाई थी। ऐसे में एशियाई खेलों में भी उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी। महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में उनकी मौजूदगी ने मुकाबले को भारतीय प्रशंसकों के लिए खास बना दिया था।

प्रतियोगिता के दौरान मनु ने अपनी निशानेबाजी में नियंत्रण और अनुभव दिखाने की कोशिश की, लेकिन फाइनल के निर्णायक दौर में वह पदक की स्थिति तक नहीं पहुंच सकीं। निशानेबाजी जैसे खेल में बेहद छोटे अंतर से भी अंतिम परिणाम बदल जाता है। एकाग्रता, तकनीक और दबाव के बीच सही शॉट लगाना पदक की दौड़ में बने रहने के लिए अहम होता है। मनु के प्रदर्शन में भी यही चुनौती देखने को मिली।

एशियाई खेलों में 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा का स्तर काफी प्रतिस्पर्धी रहा। एशिया में निशानेबाजी के कई मजबूत खिलाड़ी हैं और ऐसे मुकाबलों में शीर्ष स्थान के लिए हर शॉट महत्वपूर्ण होता है। फाइनल में पहुंचने के बाद खिलाड़ियों के लिए मानसिक दबाव और बढ़ जाता है, क्योंकि मामूली चूक भी पदक की संभावना खत्म कर सकती है। मनु इस दबाव के बीच अपने प्रदर्शन को पदक तक नहीं ले जा सकीं।

मनु भाकर का अंतरराष्ट्रीय सफर हालांकि इस एक परिणाम से कहीं बड़ा है। उन्होंने कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी में अपनी पहचान बनाई थी। कई प्रमुख प्रतियोगिताओं में पदक जीतने के बाद वह भारतीय टीम की अहम सदस्य बनीं। पेरिस ओलंपिक में उनके प्रदर्शन ने उन्हें देश के सबसे चर्चित निशानेबाजों में शामिल कर दिया। उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल और मिश्रित टीम स्पर्धा में पदक हासिल किए थे।

पेरिस ओलंपिक की सफलता के बाद मनु पर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उम्मीदों का दबाव भी बढ़ा है। हर बड़ी प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन पर भारतीय खेल प्रशंसकों की नजर रहती है। एशियाई खेलों में 10 मीटर एयर पिस्टल में पदक से चूकना उनके लिए निराशाजनक परिणाम जरूर है, लेकिन यह उनके लंबे खेल करियर का केवल एक मुकाबला है।

भारतीय निशानेबाजी दल के लिए भी एशियाई खेल महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इस खेल में भारत ने पिछले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत की है। युवा और अनुभवी निशानेबाजों से भारतीय दल को कई पदकों की उम्मीद रहती है। मनु जैसी अनुभवी खिलाड़ी की मौजूदगी टीम के लिए अतिरिक्त मजबूती मानी जाती है। ऐसे में उनके पदक से चूकने के बाद भारतीय टीम की नजरें अब अन्य स्पर्धाओं और खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर रहेंगी।

10 मीटर एयर पिस्टल में पदक हासिल नहीं कर पाने के बावजूद मनु भाकर के पास प्रतियोगिता में आगे भी प्रदर्शन करने के अवसर हो सकते हैं, क्योंकि वह कई स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं। भारतीय प्रशंसक उनसे आने वाले मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रखेंगे।

एशियाई खेलों में किसी खिलाड़ी का प्रदर्शन केवल एक मुकाबले से तय नहीं होता। निशानेबाजी में परिस्थितियां, फाइनल का दबाव और उस दिन की लय परिणाम को प्रभावित कर सकती है। मनु के लिए भी यह मुकाबला इसी व्यापक प्रतियोगी प्रक्रिया का हिस्सा है। दो ओलंपिक पदक जीत चुकी भारतीय निशानेबाज अब आगे की स्पर्धाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगी और भारतीय दल की पदक तालिका में योगदान देने की कोशिश करेंगी।

 

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