नई दिल्ली। देश के स्कूलों और उनके आसपास बिकने वाले ज्यादा नमक, चीनी और वसा वाले खाद्य पदार्थों को लेकर नियम और सख्त किए जा सकते हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने इस संबंध में नए नियमों का मसौदा जारी किया है।
मौजूदा नियमों के तहत स्कूल परिसर और उसके 50 मीटर के दायरे में ज्यादा नमक, चीनी और वसा वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर वर्ष 2020 से रोक है। हालांकि, अब तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं था कि किन खाद्य पदार्थों को इस श्रेणी में रखा जाए।
नए मसौदे में खाद्य पदार्थों में मौजूद नमक, चीनी और वसा की मात्रा के आधार पर यह तय करने का प्रस्ताव है कि किसी उत्पाद की स्कूल के आसपास बिक्री की अनुमति होगी या नहीं।
मौजूदा व्यवस्था के तहत चिप्स, बिस्किट, नमकीन और शीतल पेय जैसे उत्पादों की कोई अलग से तय प्रतिबंधित सूची नहीं है। नए नियमों में पोषण संबंधी मानकों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि कौन से खाद्य पदार्थ बच्चों के लिए अधिक नुकसानदायक माने जाएंगे।
स्कूल की कैंटीन, भोजनालय, छात्रावास और स्कूल के मुख्य द्वार से 50 मीटर तक ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री के साथ-साथ बच्चों को आकर्षित करने वाले विज्ञापनों पर भी मौजूदा नियमों में रोक का प्रावधान है।
एफएसएसएआई के अनुसार, स्कूलों के लिए फिलहाल कोई अनिवार्य स्वस्थ भोजन सूची या नमूना मेन्यू तैयार नहीं किया गया है। मसौदा अंतिम रूप लेने के बाद ही पोषक तत्वों के मानकों के आधार पर प्रतिबंधित किए जाने वाले खाद्य पदार्थों की स्थिति स्पष्ट होगी।
नए मानक और खाद्य पदार्थों की सूची तय होने के बाद स्कूल कर्मचारियों को नियमों के बारे में प्रशिक्षण और आवश्यक मार्गदर्शन दिए जाने की योजना है।
वहीं, ‘ईट राइट स्कूल’ कार्यक्रम फिलहाल स्कूलों के लिए स्वैच्छिक है। इसे अभी अनिवार्य नहीं किया गया है।
स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में खाद्य पदार्थों की बिक्री से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने और निगरानी की जिम्मेदारी राज्यों के खाद्य सुरक्षा विभागों की होगी।
अभी इन नए नियमों को पूरी तरह लागू करने की कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई है। मसौदे पर प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम नियम जारी होने के बाद इसकी आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
नए प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य स्कूल जाने वाले बच्चों को ऐसे खाद्य पदार्थों की अत्यधिक उपलब्धता और प्रचार से बचाना है, जिनमें नमक, चीनी और वसा की मात्रा अधिक हो सकती है। अंतिम नियमों में पोषण संबंधी मानकों के आधार पर खाद्य पदार्थों की श्रेणी और बिक्री से जुड़े प्रावधान स्पष्ट किए जाएंगे।