IIT बॉम्बे केस: CCTV में क्या दिखा, FIR पर क्यों उठे सवाल?

देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत का मामला चर्चा में है।

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  • September 26, 2026 8:30 pm IST, Published 6 hours ago

मुंबई। देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत का मामला चर्चा में है। परीक्षा हॉल में हुई घटना के बाद छात्र की मौत, परिवार द्वारा लगाए गए जातिगत भेदभाव के आरोप और सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच मामले की जांच कर रही है। परीक्षा हॉल से लेकर हॉस्टल तक की गतिविधियों को समझने के लिए सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

परीक्षा हॉल के CCTV में क्या दिखाई दिया?

18 सितंबर 2026 को आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे परीक्षा दे रहे थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोपहर करीब 12:30 से 12:45 बजे के बीच रिकॉर्ड हुए सीसीटीवी फुटेज में साहिल अपनी जेब में रखी किसी वस्तु को देखते दिखाई देते हैं। इसके बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला उनके पास पहुंचते हैं और उनसे पूछताछ करते हैं। कथित तौर पर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर यह कार्रवाई हुई थी। फुटेज में प्रोफेसर साहिल को परीक्षा हॉल से अलग ले जाते दिखाई देते हैं। हालांकि, केवल वीडियो के आधार पर दोनों के बीच हुई बातचीत या कथित दुर्व्यवहार की पुष्टि नहीं की जा सकती। जांच एजेंसी घटना के वास्तविक क्रम को समझने के लिए अन्य साक्ष्य भी जुटा रही है।

परीक्षा हॉल से हॉस्टल तक क्या हुआ?

मामले की जांच में सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक साहिल की परीक्षा हॉल से हॉस्टल तक की गतिविधियां हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, साहिल दोपहर करीब 1:25 बजे अपने हॉस्टल के कमरे में पहुंचे। इसके बाद उनके कमरे से बाहर निकलने का कोई दृश्य सामने नहीं आया। उसी शाम उनकी मौत की जानकारी मिली। क्राइम ब्रांच परिसर के अलग-अलग स्थानों पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग का अध्ययन कर रही है। इसके साथ ही परीक्षा के दौरान मौजूद विद्यार्थियों और संबंधित कर्मचारियों के बयान भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हैं।

परिवार ने लगाए जातिगत भेदभाव के गंभीर आरोप

साहिल के पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को पिछले कुछ महीनों से जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था। परिवार का कहना है कि परीक्षा के दिन हुई घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिवार की शिकायत के आधार पर पवई पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। दूसरी ओर, आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने संस्थागत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। फिलहाल आरोपों की जांच जारी है और किसी आरोपी का दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

FIR और CCTV के बीच क्या है असली सवाल?

सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि परीक्षा के दौरान हुई घटना और परिवार द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों के बीच क्या संबंध था। फुटेज परीक्षा हॉल की गतिविधियों का दृश्य रिकॉर्ड उपलब्ध कराता है, लेकिन इससे किसी व्यक्ति की पूरी बातचीत, उसके व्यवहार के पीछे की परिस्थितियों या पूर्व में कथित उत्पीड़न की पुष्टि नहीं होती। इसीलिए जांच एजेंसी के सामने सीसीटीवी के अतिरिक्त गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्य और संस्थान के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच करना भी आवश्यक है।

प्रोफेसर के समर्थन में आईआईटी बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने भी अपनी बात रखी है। इस बीच मामले को लेकर छात्रों और शिक्षकों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने की जांच

24 सितंबर को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने आईआईटी बॉम्बे पहुंचकर मामले की जांच की। उन्होंने परीक्षा हॉल, संबंधित विभाग और साहिल के हॉस्टल का निरीक्षण किया। साथ ही संस्थान के निदेशक, अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों से बातचीत कर घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त की आयोग ने पुलिस को सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, आधिकारिक पत्राचार और परीक्षा से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने निष्पक्ष एवं शीघ्र जांच के साथ विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा है।

छात्रों की 18 मांगें, प्रशासन पर बढ़ा दबाव

साहिल की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे के विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए संस्थान के सामने 18 मांगें रखी हैं। इनमें स्वतंत्र जांच, प्रोफेसर के निलंबन, शिकायत निवारण व्यवस्था में सुधार, बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और परिसर में चौबीस घंटे मनोचिकित्सक की उपलब्धता जैसी मांगें शामिल हैं। प्रशासन ने प्रोफेसर डुल्ला को डीन के प्रशासनिक पद से हटा दिया था, हालांकि वह संस्थान में शिक्षक बने हुए हैं। छात्रों ने अपनी मांगों पर 26 सितंबर तक विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने की मांग की थी।

अब क्राइम ब्रांच की जांच पर निगाहें

साहिल वाकोडे की मौत के मामले में अब पुलिस की जांच और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि परीक्षा के दौरान क्या बातचीत हुई, परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य उपलब्ध हैं और घटना से पहले संस्थान की ओर से कौन-सी प्रक्रियाएं अपनाई गई थीं। इस मामले ने उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, सम्मान, पारदर्शी अनुशासनात्मक कार्रवाई और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था पर व्यापक चर्चा शुरू कर दी है। अंतिम निष्कर्ष जांच में सामने आने वाले प्रमाणों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निर्धारित होगा।

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