नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पहली बार ममता बनर्जी समर्थित तृणमूल कांग्रेस ने उत्तर दिनाजपुर के चोपड़ा में अपनी सांगठनिक ताकत का प्रदर्शन किया। रविवार को चोपड़ा विधानसभा क्षेत्र के कमलागांव-सुजाली ग्राम पंचायत में आयोजित पार्टी की बैठक में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक जुटे। बैठक में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद रहे। उनके अलावा इटाहार के विधायक मुशर्रफ हुसैन समेत पार्टी के कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक शुरू होने से पहले पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने मोबाइल फोन के जरिए कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को संबोधित किया। अपने संदेश में उन्होंने हाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पार्टी छोड़कर जाने वाले सांसदों और विधायकों को वापस लौटने के लिए 15 दिन की समय-सीमा दी। ममता ने कहा कि जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी है, उनके पास वापस आने का मौका है, लेकिन तय समय के बाद पार्टी में उनके लिए जगह नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी की असली ताकत उसके नेता नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े कार्यकर्ता और समर्थक हैं।
ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में पार्टी के भीतर हाल के घटनाक्रम पर नाराजगी जताते हुए कई नेताओं पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि जिन नेताओं को पार्टी ने चुनाव जिताने में भूमिका निभाई, उनमें से कुछ ने बाद में पार्टी का साथ छोड़ दिया। उन्होंने ऐसे नेताओं को ‘गद्दार’ बताते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस अपने संगठन को फिर से मजबूत करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ विपक्षी राजनीति को प्रभावी बनाना है तो तृणमूल कांग्रेस को मजबूत करना जरूरी है। ममता ने INDIA गठबंधन में टीएमसी की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
कल्याण बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे आगामी चुनाव में बड़ा राजनीतिक विषय बन सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि अगला चुनाव INDIA गठबंधन के नाम पर लड़ा जाएगा और पश्चिम बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीटों पर गठबंधन की जीत होगी। हालांकि, यह एक राजनीतिक दावा है और इसके समर्थन में कोई चुनावी परिणाम अभी उपलब्ध नहीं है। ममता बनर्जी ने अपने संदेश में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा चुनावी व्यवस्था के रहते भाजपा को फायदा मिल रहा है। साथ ही उन्होंने अपने राजनीतिक संगठन को फिर से खड़ा करने का भरोसा जताया और कहा कि जिस तरह उन्होंने 1998 में तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था, उसी तरह वह अब भी पार्टी को नए सिरे से मजबूत कर सकती हैं।
चोपड़ा की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक और राजनीतिक संकट की चर्चा तेज है। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी दो धड़ों के बीच विवाद चल रहा है और चुनाव आयोग दोनों पक्षों से बातचीत कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल में चुनाव आयोग को इस विवाद पर तीन महीने के भीतर फैसला लेने को कहा है। ऐसे माहौल में उत्तर दिनाजपुर में ममता समर्थक गुट का यह शक्ति प्रदर्शन पार्टी के जमीनी संगठन को सक्रिय करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
बैठक के जरिए ममता बनर्जी और कल्याण बनर्जी ने एक ओर पार्टी छोड़ चुके नेताओं को वापसी का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर कार्यकर्ताओं को संगठन के केंद्र में रखने की बात कही। अब देखना होगा कि 15 दिन की दी गई समय-सीमा के बाद पार्टी से अलग हुए नेताओं में से कितने वापस लौटते हैं और तृणमूल कांग्रेस अपने संगठनात्मक संकट को किस तरह संभाल पाती है।