नई दिल्ली: सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत प्रस्तावित लाइब्रेरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत ने केंद्र को नोटिस जारी करते हुए मौजूदा पुस्तक संग्रह और नई लाइब्रेरी में उसके लिए तय की गई जगह से जुड़े सवालों पर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि लंबे समय से सुरक्षित रखी गई किताबों को भविष्य की लाइब्रेरी में किस तरह समायोजित किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच और अदालत की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता हरि प्रिया पद्मनाभन को भी नियुक्त किया है। अदालत का यह कदम लाइब्रेरी से जुड़े रिकॉर्ड, मौजूदा किताबों की संख्या और प्रस्तावित भवन में उनके लिए उपलब्ध स्थान की स्थिति को स्पष्ट करने के उद्देश्य से देखा जा रहा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने आरके पुरम में रखे गए पुराने पुस्तक संग्रह का मुद्दा भी आया। अदालत को बताया गया कि करीब दो लाख किताबें वहां कार्टन में पैक रखी हुई हैं। इन पुस्तकों को लंबे समय से खोला नहीं गया है। सुनवाई में यह तथ्य सामने आने के बाद अदालत ने पुस्तक संग्रह की वास्तविक स्थिति और उसे सुरक्षित रखने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। अदालत ने केंद्र से यह स्पष्ट करने को कहा कि मौजूदा पुस्तक संग्रह का कुल आकार कितना है और सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत तैयार की जा रही नई लाइब्रेरी में इन किताबों को रखने के लिए कितनी जगह प्रस्तावित है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि भविष्य की सुविधा में पुराने संग्रह को व्यवस्थित तरीके से रखने के लिए पर्याप्त क्षमता मौजूद होगी या नहीं।
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी अदालत के सामने पेश हुईं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उनसे प्रस्तावित लाइब्रेरी के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई सवाल किए। अदालत ने विशेष रूप से यह जानने की कोशिश की कि लाइब्रेरी के साथ-साथ किताबों के संग्रह के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया गया है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि सेंट्रल विस्टा परिसर में प्रस्तावित कॉन्फ्रेंस रूम और दूसरी सुविधाओं के लिए निर्धारित स्थान का लाइब्रेरी पर क्या असर पड़ेगा। अदालत यह स्पष्टता चाहती है कि अन्य सुविधाओं की जरूरतों के बीच पुस्तक संग्रह के लिए पर्याप्त जगह को किस तरह सुनिश्चित किया जाएगा।
मामले में अदालत की चिंता सिर्फ भवन या कमरे के आकार तक सीमित नहीं है। लंबे समय से पैक रखी किताबों की उपलब्धता, उनका संरक्षण और उन्हें पाठकों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण पहलू हैं। ऐसे में नई लाइब्रेरी की योजना बनाते समय मौजूदा संग्रह को ध्यान में रखने की जरूरत पर सुनवाई के दौरान जोर दिखाई दिया। अब केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अदालत के सामने संबंधित जानकारी और अपना जवाब रखना होगा। इसमें मौजूदा पुस्तक संग्रह की मात्रा, उसके लिए प्रस्तावित जगह और नई लाइब्रेरी की संरचना से जुड़े विवरण शामिल हो सकते हैं। इसके बाद अदालत मामले में आगे की दिशा तय करेगी।
सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बनने वाली नई सुविधाओं को लेकर पहले भी अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा होती रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का ताजा रुख यह बताता है कि प्रस्तावित लाइब्रेरी में मौजूद पुस्तक संग्रह को लेकर पर्याप्त स्पष्टता जरूरी है। अदालत के अगले कदम का आधार केंद्र की ओर से दाखिल किया जाने वाला विस्तृत जवाब होगा।