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MLC चुनाव से पहले उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में बगावत

हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी में किसी बगावत से इनकार किया है। उनका कहना है कि रालोमो एनडीए के साथ है और जहां गठबंधन का अधिकृत उम्मीदवार है, वहां पार्टी उसका समर्थन कर रही है। कुशवाहा ने सारण सीट पर भी जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर के समर्थन की बात दोहराई। इस तरह पार्टी नेतृत्व और तीन विधायकों के रुख में साफ अंतर दिखाई दे रहा है

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Gauravshali Bharat News
  • October 6, 2026 2:04 pm IST, Published 43 minutes ago

पटना: बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक क्षेत्र की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोक मोर्चा यानी रालोमो में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। एनडीए का हिस्सा रही उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के तीन विधायकों ने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाते हुए रालोमो के प्रदेश महासचिव और प्रवक्ता रामपुकार सिन्हा के समर्थन का ऐलान किया है। रामपुकार सिन्हा ने सोमवार को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया था। उनके नामांकन के दौरान रालोमो के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक आलोक कुमार सिंह, माधव आनंद और रामेश्वर महतो मौजूद रहे।

सारण शिक्षक सीट पर एनडीए की ओर से जनता दल यूनाइटेड ने आनंद पुष्कर को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में एनडीए के सहयोगी दल रालोमो के तीन विधायकों का गठबंधन उम्मीदवार के बजाय अपनी ही पार्टी के नेता रामपुकार सिन्हा के साथ खड़ा होना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। तीनों विधायकों ने कार्यकर्ताओं के सम्मान और संगठन की स्थिति का हवाला देते हुए सिन्हा को समर्थन देने की बात कही है। इससे बिहार के सियासी गलियारों में रालोमो के भीतर चल रहे मतभेदों की चर्चा तेज हो गई है।

मामले पर राजद विधायक भाई वीरेंद्र यादव ने रालोमो की अंदरूनी स्थिति पर तंज कसा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के सभी लोग उपेंद्र कुशवाहा को नेता नहीं मानते और कुशवाहा की राजनीति परिवार तक सीमित है। भाई वीरेंद्र के मुताबिक, पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ने के कारण नेताओं और विधायकों ने अपना अलग रास्ता चुनना शुरू कर दिया है। हालांकि, ये आरोप राजद विधायक की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं और रालोमो की ओर से इन पर अलग रुख रखा गया है।

दरअसल, रालोमो में असंतोष की चर्चा पहले से होती रही है। इस साल जनवरी में भी पार्टी के भीतर असंतुष्ट माने जा रहे विधायक आलोक कुमार सिंह को बिहार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। उस समय इसे संगठन के भीतर मतभेद दूर करने की कोशिश के तौर पर देखा गया था। अब वही आलोक कुमार सिंह रामपुकार सिन्हा के नामांकन में शामिल हुए हैं और उनके समर्थन में खड़े दिखाई दिए हैं।

रामपुकार सिन्हा की उम्मीदवारी ने इसलिए भी विवाद बढ़ाया है क्योंकि वह रालोमो के प्रदेश स्तर के पदाधिकारी हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने पहले ही एमएलसी चुनाव को लेकर पार्टी की लाइन स्पष्ट करते हुए एनडीए के अधिकृत उम्मीदवारों के समर्थन की बात कही थी। उन्होंने पार्टी नेताओं को चुनाव से जुड़ी ऐसी गतिविधियों से बचने की चेतावनी भी दी थी, जिन्हें अनुशासनहीनता माना जा सकता है। इसके बावजूद तीन विधायकों का रामपुकार सिन्हा के साथ खड़ा होना पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती माना जा रहा है।

हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी में किसी बगावत से इनकार किया है। उनका कहना है कि रालोमो एनडीए के साथ है और जहां गठबंधन का अधिकृत उम्मीदवार है, वहां पार्टी उसका समर्थन कर रही है। कुशवाहा ने सारण सीट पर भी जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर के समर्थन की बात दोहराई। इस तरह पार्टी नेतृत्व और तीन विधायकों के रुख में साफ अंतर दिखाई दे रहा है।

रालोमो के विधायक माधव आनंद ने दूसरी ओर कहा है कि वे कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान के मुद्दे पर रामपुकार सिन्हा के साथ खड़े हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार के समर्थन को लेकर उनका रुख नहीं बदला है। यानी विधायकों की ओर से अपने कदम को सीधे तौर पर सरकार या एनडीए से अलग होने के रूप में पेश नहीं किया जा रहा है।

बिहार में विधान परिषद चुनाव के बीच सामने आया यह घटनाक्रम एनडीए के भीतर सीटों और उम्मीदवारों को लेकर तालमेल की चुनौती को भी उजागर करता है। खासकर सारण शिक्षक सीट पर एक ही गठबंधन के दो अलग-अलग धड़ों के सक्रिय होने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब चुनावी नतीजे यह बताएंगे कि पार्टी नेतृत्व के आधिकारिक रुख का कितना असर पड़ता है और रामपुकार सिन्हा के समर्थन में सामने आए तीन विधायकों का प्रभाव कितना रहता है।

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