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सुप्रीम कोर्ट में 3 नए जजों की एंट्री, अब बढ़ी महिला ताकत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के आधार पर गुजरात हाई कोर्ट की तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुनीता अग्रवाल, दिल्ली हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति को मंजूरी दी थी।

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  • October 6, 2026 8:30 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: भारत की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट को तीन नए न्यायाधीश मिल गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के आधार पर गुजरात हाई कोर्ट की तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुनीता अग्रवाल, दिल्ली हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति को मंजूरी दी थी। इसके बाद मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को तीनों न्यायाधीशों ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण कर ली।

इन नियुक्तियों के साथ सुप्रीम कोर्ट की कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़कर 37 हो गई है। अदालत की स्वीकृत क्षमता 38 न्यायाधीशों की है। इस तरह अब शीर्ष अदालत में केवल एक पद रिक्त रह गया है। तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को न्यायिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक, प्रशासनिक और अन्य महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद पूरा हुआ नियुक्ति प्रक्रिया का अहम चरण

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर 2026 को इन तीनों नामों की सिफारिश की थी। कॉलेजियम की अध्यक्षता उस समय भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत कर रहे थे। विचार-विमर्श के बाद जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने की सिफारिश की गई। इसके बाद नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अक्टूबर को इन नियुक्तियों को औपचारिक मंजूरी प्रदान की।

केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी नियुक्तियों की जानकारी सार्वजनिक की थी। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद मंगलवार को तीनों न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण का रास्ता साफ हो गया। 6 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने तीनों नए न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

जस्टिस सुनीता अग्रवाल की नियुक्ति क्यों खास?

तीनों नियुक्तियों में जस्टिस सुनीता अग्रवाल का सुप्रीम कोर्ट पहुंचना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थीं और इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में काम कर चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट में उनके शामिल होने के बाद शीर्ष अदालत में महिला न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। उनके साथ जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस वी. मोहना भी सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत महिला न्यायाधीश हैं।

जस्टिस सुनीता अग्रवाल की न्यायिक पृष्ठभूमि लंबे समय तक हाई कोर्ट में संवैधानिक, सेवा और अन्य महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई से जुड़ी रही है। उनकी नियुक्ति को शीर्ष अदालत में महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे सुप्रीम कोर्ट की पीठ में लैंगिक विविधता को मजबूती मिलेगी।

जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय का लंबा न्यायिक अनुभव

जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले वह बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हैं। उनका न्यायिक करियर इलाहाबाद हाई कोर्ट से जुड़ा रहा है। कानून के क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण उन्हें संवैधानिक और प्रशासनिक मामलों की अच्छी समझ रखने वाला न्यायाधीश माना जाता है।

उनका सुप्रीम कोर्ट में आना इसलिए भी अहम है क्योंकि उन्होंने अलग-अलग उच्च न्यायालयों में न्यायिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली हैं। अब शीर्ष अदालत में उनकी भूमिका राष्ट्रीय महत्व के मामलों की सुनवाई में होगी।

जस्टिस अपरेश कुमार सिंह भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

जस्टिस अपरेश कुमार सिंह तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थे। इससे पहले उनका न्यायिक अनुभव झारखंड हाई कोर्ट और त्रिपुरा हाई कोर्ट से भी जुड़ा रहा। उनके पास विभिन्न संवैधानिक और कानूनी मामलों की सुनवाई का व्यापक अनुभव है।

तीनों न्यायाधीशों का अलग-अलग हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के रूप में काम करने का अनुभव सुप्रीम कोर्ट की पीठ के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कॉलेजियम की सिफारिश में वरिष्ठता, योग्यता, ईमानदारी, क्षेत्रीय विविधता और विभिन्न हाई कोर्ट से उचित प्रतिनिधित्व जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा गया था।

सुप्रीम कोर्ट की ताकत 37, एक पद अभी भी खाली

इन तीन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट की कार्यरत क्षमता 37 न्यायाधीशों तक पहुंच गई है, जबकि स्वीकृत संख्या 38 है। यानी फिलहाल शीर्ष अदालत में एक न्यायाधीश का पद रिक्त है। अदालत की स्वीकृत क्षमता में हाल ही में बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद अधिकतम संख्या 38 हुई।

न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निस्तारण में मदद मिलने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट में संवैधानिक महत्व के मामलों के अलावा केंद्र और राज्यों से जुड़े विवाद, नागरिक अधिकार, चुनाव, प्रशासनिक फैसले, कर और अन्य महत्वपूर्ण कानूनी मामलों की सुनवाई होती है। ऐसे में पीठ की संख्या और न्यायाधीशों की उपलब्धता का सीधा असर मामलों की सुनवाई की गति पर पड़ता है।

तीन हाई कोर्ट में भी बदलेंगे मुख्य न्यायाधीश

इन नियुक्तियों का असर केवल सुप्रीम कोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा। जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह के शीर्ष अदालत में जाने के बाद गुजरात, दिल्ली और तेलंगाना हाई कोर्ट में भी मुख्य न्यायाधीश के पदों पर नई नियुक्तियों की आवश्यकता होगी। रिपोर्टों के अनुसार इन पदों के लिए प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

इस तरह तीन हाई कोर्ट के नेतृत्व में बदलाव की प्रक्रिया भी इन नियुक्तियों के साथ जुड़ गई है। आने वाले समय में इन अदालतों के नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति न्यायिक प्रशासन के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

न्यायिक व्यवस्था के लिए अहम बदलाव

सुप्रीम कोर्ट में तीन नए न्यायाधीशों का शामिल होना केवल संख्या बढ़ने तक सीमित घटनाक्रम नहीं है। तीनों न्यायाधीशों के पास अलग-अलग हाई कोर्ट में लंबे न्यायिक और प्रशासनिक अनुभव का लाभ शीर्ष अदालत को मिलेगा। वहीं जस्टिस सुनीता अग्रवाल के शामिल होने से महिला न्यायाधीशों की संख्या तीन होना भी सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में प्रतिनिधित्व के लिहाज से उल्लेखनीय है।

कुल मिलाकर राष्ट्रपति की मंजूरी और 6 अक्टूबर को हुए शपथ ग्रहण के साथ सुप्रीम कोर्ट में तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब 37 न्यायाधीशों वाली शीर्ष अदालत के सामने लंबित मामलों के निपटारे और महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों की सुनवाई को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

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