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एशियाई खेलों में तीरंदाजों का दम, ओलंपिक पर नई नजर

आइची-नागोया में नौ पदकों के साथ भारतीय तीरंदाजी ने रचा नया इतिहास

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Gauravshali Bharat News
  • October 6, 2026 8:31 pm IST, Published 1 hour ago

खेल : आइची-नागोया में एशियाई खेलों का समापन होते ही, भारतीय तीरंदाजी टीम नौ पदकों (पाँच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य) के साथ स्वदेश लौट आई है। इनमें से हर एक पदक के पीछे साहस, समर्पण और बलिदान की गाथा छिपी है, जो यह दर्शाती है कि हमारा खेल तंत्र (स्पोर्टिंग इकोसिस्टम) अब पूरी तरह परिपक्व हो चुका है।

नई पीढ़ी का नया निशाना (महासचिव, भारतीय तीरंदाजी संघ)

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सदियों से पक्षी की आँख पर नज़र टिकाए अर्जुन की छवि भारत के लिए एकाग्रता की शाश्वत सीख रही है। आइची-नागोया में यह सीख साकार हो उठी। हमारे तीरंदाजों को लक्ष्य के सिवा कुछ नहीं दिखा: न प्रतिद्वंद्वियों की ख्याति, न इतिहास का बोझ, न देश की उम्मीदों का दबाव। उन्हें केवल ‘दस’ का निशान दिखा, और उन्होंने उसे बार-बार भेदा।

हमारे कंपाउंड तीरंदाजों ने लगातार दूसरे एशियाई खेलों में पुरुषों, महिलाओं और मिक्स्ड—तीनों टीम खिताबों पर अपना कब्ज़ा जमाया। महिला कंपाउंड टीम ने फाइनल में विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की, वहीं मिक्स्ड कंपाउंड जोड़ी ने लॉस एंजिल्स (LA 2028) ओलंपिक का कोटा हासिल किया, जहाँ कंपाउंड तीरंदाजी पहली बार ओलंपिक का हिस्सा बनने जा रही है।

हालाँकि, इन खेलों की सबसे ऐतिहासिक कहानी रिकर्व वर्ग में लिखी गई, जहाँ लंबे समय से दक्षिण कोरिया का वर्चस्व रहा है। हमारी महिला रिकर्व टीम ने लगातार सात एशियाई खेलों से चले आ रहे कोरिया के दबदबे को समाप्त कर भारत को इस स्पर्धा का पहला स्वर्ण पदक दिलाया। हमारी मिक्स्ड रिकर्व जोड़ी ने इस स्पर्धा में भारत का पहला पदक जीता और पुरुष रिकर्व टीम ने लगातार दूसरा रजत पदक हासिल किया। इसके बाद, अंतिम दिन 17 वर्षीय युवा महिला तीरंदाज ने व्यक्तिगत रिकर्व फाइनल में गज़ब का धैर्य दिखाते हुए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता और भारत के लिए ओलंपिक कोटा सुरक्षित किया। दबाव के क्षणों में उनका यह निडर संयम इस बात का प्रमाण है कि भारत के युवा एथलीट कितने साहसी बन चुके हैं।

यह बात भी बेहद सुखद है कि हमारी महिला तीरंदाजों ने मोर्चे से नेतृत्व किया। रिकर्व से लेकर कंपाउंड तक, जब भी सबसे ज़्यादा ज़रूरत पड़ी, उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और देश की अनगिनत युवा बच्चियों को धनुष थामने की प्रेरणा दी है।

यह सफलता रातों-रात नहीं मिली, बल्कि लगभग 15 वर्षों के निरंतर और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है—विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, उत्कृष्ट उपकरण, अंतरराष्ट्रीय कोचिंग, खेल विज्ञान और वैश्विक मंचों पर नियमित अनुभव। कई बार ऐसा भी हुआ जब पदक मंच बेहद करीब दिखकर भी दूर रह जाता था, लेकिन हमारे कोचों, सपोर्ट स्टाफ और परिवारों का विश्वास कभी नहीं डगमगाया। नागोया में हमारे खिलाड़ियों ने कठिन परिस्थितियों, लंबे सफर, तेज़ हवाओं और भारी बारिश का भी डटकर सामना किया। इस सब के बीच उनका धैर्य उनके अद्भुत चरित्र को दर्शाता है।

यह बदलाव हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व के बिना अधूरा रहता। उनके मार्गदर्शन में खेल राष्ट्र की प्राथमिकताओं में किनारे से निकलकर बिल्कुल केंद्र में आ गए हैं। ‘खेलो इंडिया’ ने देश के दूर-दराज के कोनों से प्रतिभाओं को तराशा है, जबकि ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (TOPS) ने हमारे शीर्ष एथलीटों को वह सहयोग और सम्मान दिया है जिसके वे हकदार हैं। सबसे बढ़कर, प्रधानमंत्री जी ने खिलाड़ियों के प्रति देश के दृष्टिकोण को बदल दिया है। वे जीत और हार, दोनों में खिलाड़ियों के साथ खड़े रहते हैं और छोटे से छोटे कस्बे के हर युवा खिलाड़ी को यह विश्वास दिलाते हैं कि 140 करोड़ देशवासियों की उम्मीदें उनके साथ हैं।

खेल प्रशासन से लंबे समय से जुड़े रहने के कारण मैंने कई अभियान देखे हैं, लेकिन नागोया का अनुभव मेरे लिए भी पहला और अनूठा था। जब मैं टीम के साथ था, तो माननीय केंद्रीय खेल मंत्री ने एक नहीं बल्कि दो बार व्यक्तिगत रूप से फोन कर हमारे खिलाड़ियों की तैयारियों और कुशलक्षेम के बारे में जानकारी ली। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने यही कार्यसंस्कृति बनाई है, जहाँ देश के सर्वोच्च पद न केवल पदक मंच पर, बल्कि यात्रा के हर कदम पर हमारे खिलाड़ियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं।

जब कोई देश अपने एथलीटों का सम्मान करता है, तो वह उन पर विश्वास करने लगता है; और जहाँ विश्वास होता है, वहाँ विजेता बनते हैं। आइची-नागोया के ये पदक उन निडर युवा भारतीयों ने जीते हैं जिन्होंने झुकने से इनकार कर दिया, और यही पदक इस नए ‘स्पोर्टिंग इंडिया’ का सबसे प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। हमारे तीरंदाजों से मैं यही कहूंगा: आपने 140 करोड़ देशवासियों के दिलों को गर्व से भर दिया है। हमारे कोचों, सपोर्ट स्टाफ और परिवारों को, जिनके त्याग अक्सर अनदेखे रह जाते हैं: यह पदक जितने खिलाड़ियों के हैं, उतने ही आपके भी हैं।

मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के अनुकरणीय नेतृत्व में भारत हर खेल स्पर्धा में नई ऊँचाइयों को छुएगा और विश्व के महान खेल राष्ट्रों के बीच अपना स्वाभाविक स्थान ग्रहण करेगा। जहाँ तक हमारे तीरंदाजों का सवाल है, उन्होंने एशिया को अपनी क्षमता दिखा दी है। वे अब ओलंपिक के लिए तैयार हैं, और जल्द ही पूरा विश्व उनकी इस क्षमता का लोहा मानेगा।

 

लेखक: विरेंद्र सचदेवा, महासचिव, भारतीय तीरंदाजी संघ 

कार्यकारी बोर्ड सदस्य, वर्ल्ड आर्चरी एशिया

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