देश में 73% लोगों के आहार में प्रोटीन की कमी

हर तीसरा बच्चा कुपोषण से प्रभावित; रिपोर्ट में सामने आई चिंताजनक तस्वीर नई दिल्ली। भारत की आर्थिक प्रगति के बीच देश की बड़ी आबादी के भोजन में पोषण की कमी अब भी गंभीर चुनौती बनी हुई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश के 73 प्रतिशत लोगों के रोजाना के आहार में पर्याप्त प्रोटीन नहीं […]

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  • October 7, 2026 9:14 am IST, Published 19 minutes ago

हर तीसरा बच्चा कुपोषण से प्रभावित; रिपोर्ट में सामने आई चिंताजनक तस्वीर

नई दिल्ली। भारत की आर्थिक प्रगति के बीच देश की बड़ी आबादी के भोजन में पोषण की कमी अब भी गंभीर चुनौती बनी हुई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश के 73 प्रतिशत लोगों के रोजाना के आहार में पर्याप्त प्रोटीन नहीं पहुंच रहा है। शहरी क्षेत्रों में 44 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 36 प्रतिशत लोग अपनी दैनिक प्रोटीन जरूरत पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

शहरी भारत में भी प्रोटीन की कमी

‘द स्टेट ऑफ प्रोटीन एंड फाइबर इन अर्बन इंडिया’ और ICMR-NIN के ‘व्हाट इंडिया ईट्स’ से जुड़े आंकड़ों में पोषण को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी भारत में करीब 60 प्रतिशत लोग दाल, अंडा, दूध, पनीर, मछली और नट्स जैसे प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन नहीं करते। अध्ययन में शामिल करीब 70 प्रतिशत शहरी लोगों के रोजाना के भोजन में 41 ग्राम से कम प्रोटीन पाया गया।

यह अध्ययन दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और कोच्चि के 1,250 लोगों पर किया गया। रिपोर्ट भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान (IIMR) ने पेप्सिको इंडिया और यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल के सहयोग से जारी की है।

हर तीसरे बच्चे में पोषण की समस्या

प्रोटीन की कमी का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार, पांच वर्ष से कम उम्र के 35 प्रतिशत बच्चे बौनेपन से प्रभावित हैं, जबकि 32 प्रतिशत बच्चे कम वजन की समस्या से जूझ रहे हैं।

इसके अलावा 6 से 59 महीने की उम्र के 67.1 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से प्रभावित हैं। वहीं, 15 से 19 वर्ष की 59.1 प्रतिशत किशोरियां एनीमिया की शिकार हैं।

महंगे खाद्य पदार्थ और सुविधाजनक विकल्पों की कमी बड़ी बाधा

अध्ययन में लोगों ने पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर नहीं ले पाने के पीछे कई कारण बताए। करीब 60 प्रतिशत लोगों ने प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों की अधिक कीमत को बड़ी बाधा माना। वहीं, 57 प्रतिशत लोगों ने सुविधाजनक विकल्पों की कमी की बात कही।

फाइबर को लेकर भी स्थिति ऐसी ही है। करीब 69 प्रतिशत लोगों ने सुविधाजनक और भरोसेमंद विकल्पों की कमी को प्रमुख समस्या बताया। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 90 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि प्रोटीन को रोजमर्रा के भोजन में आसानी से शामिल किया जा सके।

बाजरा और रागी को भोजन में शामिल करने पर जोर

पोषण में सुधार के लिए श्रीअन्न (मिलेट्स) को रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। IIMR न्यूट्री हब के अनुसार, श्रीअन्न मिशन, पोषण अभियान और मिड-डे मील में बाजरा व रागी को शामिल करना देश में पोषण सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित आहार में दाल, दूध, अंडा, मछली, नट्स और मिलेट्स जैसे पोषक खाद्य पदार्थों को उचित मात्रा में शामिल करना प्रोटीन और फाइबर की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकता है।

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