मुंबई: फलों को जल्द पकाने के लिए रसायनों के कथित गलत इस्तेमाल को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने कार्रवाई तेज कर दी है। मुंबई में एथिफॉन के घोल में डुबोकर केले पकाने का मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में केले जब्त किए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान करीब 1,394 किलोग्राम केले जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 67,814 रुपये बताई गई है। मामले में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब बाजारों में फलों की गुणवत्ता और उन्हें प्राकृतिक तरीके से पकाने को लेकर उपभोक्ताओं के बीच लगातार सवाल उठते रहे हैं। FDA की ओर से मुंबई के अलग-अलग खाद्य प्रतिष्ठानों में भी निरीक्षण अभियान चलाया गया, जहां स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की गई।
एथिफॉन के इस्तेमाल पर क्यों उठे सवाल?
एथिफॉन ऐसा रसायन है जो पौधों में एथिलीन जैसी प्रक्रिया को बढ़ावा देकर फलों को पकाने में मदद कर सकता है। हालांकि, किसी भी रसायन का इस्तेमाल निर्धारित मानकों, मात्रा और स्वीकृत प्रक्रिया के अनुसार होना जरूरी है। गलत तरीके से या सीधे रसायन के घोल में फल डुबोकर पकाने की प्रक्रिया खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय बन सकती है।
मुंबई में सामने आए मामले में अधिकारियों ने कथित तौर पर केले को एथिफॉन के घोल में डुबोकर पकाने की प्रक्रिया पकड़ी। इसके बाद खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के तहत कार्रवाई की गई। अधिकारियों की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना भी है कि इस प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए रसायन की मात्रा और तरीका निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप था या नहीं।
1,394 किलो केले जब्त, कीमत करीब 67 हजार रुपये
FDA की कार्रवाई में 1,394 किलोग्राम केले जब्त किए गए। इनकी अनुमानित कीमत करीब 67,814 रुपये बताई गई है। इतनी बड़ी मात्रा में केले पकाने के लिए रासायनिक प्रक्रिया अपनाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया।
कार्रवाई के दौरान संबंधित खाद्य सामग्री को जब्त कर आगे की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों की ओर से नमूने लेने, दस्तावेजों की जांच और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत है कि बाजार में केवल फल की बाहरी चमक और रंग देखकर उसकी गुणवत्ता का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। फल खरीदते समय उसकी स्थिति, गंध, बनावट और बिक्री स्थल की स्वच्छता पर भी ध्यान देना जरूरी है।
मुंबई के खाद्य प्रतिष्ठानों में भी छापेमारी
केवल केले के मामले तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही। मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण भी किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 11 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई, जिनमें पश्चिमी उपनगरों के साथ दक्षिण मुंबई के कुछ इलाके भी शामिल रहे।
निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर खाद्य पदार्थों को गलत तापमान पर रखने, बिल या आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने तथा साफ-सफाई से जुड़ी कमियां पाए जाने की जानकारी सामने आई। कुछ प्रतिष्ठानों में मक्खियां और कीड़े-मकोड़े पाए जाने की बात भी सामने आई।
खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता की कमी सीधे तौर पर ग्राहकों के स्वास्थ्य और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए रेस्टोरेंट, होटल, मिठाई की दुकान और अन्य खाद्य कारोबारियों के लिए साफ-सफाई तथा सुरक्षित भंडारण बेहद जरूरी है।
मिलावटी दूध के मामलों में भी केस दर्ज
FDA की कार्रवाई के दौरान पुणे डिविजन में मिलावटी दूध से जुड़े मामलों पर भी केस दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि खाद्य सुरक्षा विभाग फलों और सब्जियों के साथ-साथ दूध तथा अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की भी जांच कर रहा है।
खाद्य पदार्थों में मिलावट या नियमों के विपरीत उत्पादन और भंडारण उपभोक्ताओं के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर बाजारों, दुकानों, रेस्टोरेंट और खाद्य उत्पादन केंद्रों का निरीक्षण करती हैं।
उपभोक्ता केले खरीदते समय क्या सावधानी रखें?
केले या अन्य फल खरीदते समय उपभोक्ताओं को कुछ सामान्य सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। बहुत अधिक चमकदार या असामान्य रूप से एक समान रंग वाले फल देखकर तुरंत उन्हें बेहतर गुणवत्ता का न मानें। फल की गंध, बनावट और सामान्य पकने की स्थिति को भी देखें।
हालांकि, केवल देखकर यह निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता कि किसी फल को किस तरीके से पकाया गया है। इसलिए संदिग्ध स्थिति में उपभोक्ताओं को स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग को शिकायत करनी चाहिए।
फल को अच्छी तरह धोकर खाना भी सामान्य खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कटे हुए या खराब हो चुके फलों को खरीदने से बचना चाहिए और घर में फलों को साफ एवं सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए।
FDA की कार्रवाई से कारोबारियों को संदेश
मुंबई में हुई कार्रवाई से खाद्य कारोबारियों के लिए स्पष्ट संदेश जाता है कि फलों को पकाने, रखने और बेचने के दौरान निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी है। किसी भी रसायन का इस्तेमाल मनमाने तरीके से करना या उपभोक्ताओं को बिना जानकारी दिए ऐसी प्रक्रिया से तैयार खाद्य सामग्री बेचना कार्रवाई का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फल पकाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों और तरीकों को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। कारोबारियों को केवल अधिक मुनाफे या जल्दी बिक्री के लिए ऐसी प्रक्रिया नहीं अपनानी चाहिए जिससे खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हो।
निष्कर्ष
मुंबई में एथिफॉन के घोल में केले पकाने के मामले में करीब 1,394 किलो केले जब्त किए जाने की कार्रवाई ने बाजार में फलों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है। साथ ही, खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता संबंधी कमियों पर कार्रवाई और पुणे में मिलावटी दूध के मामलों में केस दर्ज होना यह बताता है कि खाद्य सुरक्षा जांच का दायरा व्यापक है।
उपभोक्ताओं को भी जागरूक रहना चाहिए और संदिग्ध खाद्य पदार्थ या अस्वच्छ खाद्य प्रतिष्ठान दिखाई देने पर संबंधित विभाग को इसकी सूचना देनी चाहिए। वहीं कारोबारियों की जिम्मेदारी है कि वे खाद्य सुरक्षा के सभी निर्धारित नियमों का पालन करें और उपभोक्ताओं की सेहत को प्राथमिकता दें।